लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 16, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज (गतांक से आगे) कपिलेश:- आपने अपने गीत में कहा है- ‘भोट माङणी च्वाख-चुपाड़ा जतुक छन/रात-स्यात सबनै की जेडि़या भै नाल।/उनरै सुकरम त पिड़ै रैईं आज/ आजि जाँणि अघिलि काँ जाँलें पेड़ाल !!’’…मौजूदा दौर में आपको किनसे उम्मीद है ? गिर्दा:- मित्र, रास्ता तो जनसंघर्षों का ही है। अन्ततः तो आपकी आस्था जनसंघर्षों पर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 28, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज यों तो पिछले तीन दशकों में गिर्दा से समय-समय पर समाज, साहित्य, राजनीति और समसामयिक हलचलों पर विस्तृत बात-चीत बहस होती ही रही। बातचीत में उन्होंने जो-जो कहा, वह सब स्मृति में तो बना रहा लेकिन भेंटवार्ता के रूप में मैं कभी उसे व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं कर पाया। कुछ समय पहले [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 25, 2011 पर प्रकाशित
(सन् 1969 में प्रकाशित कुमाउनी कविता संग्रह ‘शिखरों के स्वर’ का गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ के साथ संपादन-प्रकाशन करने वाले दुर्गेश पंत को 18 सितम्बर 2010 की शाम तक खबर ही नहीं थी कि गिर्दा नहीं रहे। दरअसल, वे दूर बंगलौर में थे। ‘शिखरों के स्वर’ की कल्पना 1966-67 के दौर में तब हुई थी जब [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 8, 2010 पर प्रकाशित
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के सोबनसिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में अध्यापन कर रहे डॉ. शेखर जोशी स्वयं की विकसित की हुई शैली ‘नेल पेण्टिंग’ में अपने अद्भुत् चित्रांकन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। यूँ तो उन्होंने चित्रकला की अन्य विधाओं पर भी काम किया है, लेकिन नेल पेंटिंग में नाखूनों द्वारा आकृति रचना और [...]
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लेखक : कमल जोशी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
[इस 17 मार्च को बी.डी. पांडे 93 वर्ष पूरे करते। 1917 को उत्तराखण्ड के हल्द्वानी शहर (जनपद नैनीताल) में पैदा हुए भैरब दत्त पाण्डे ने 1931 में राजकीय इण्टरमीडिएट कॉलेज अल्मोड़ा से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। 1935 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी. एससी. की डिग्री लेने के बाद वे आगे पढ़ने कैम्ब्रिज यूनीवर्सिटी चले [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
( जनकवि गिर्दा के साथ योगेश पंत की बातचीत) प्रश्न:- आपकी पहचान राजेन्द्र रावत ‘राजू’ से कब हुई ? उत्तर:- उनके लेखन और देश के विभिन्न परिवर्तनकामी समूहों से उनके जुड़ाव के बारे में तो जानता था, उनसे मुलाकात भी थी। लेकिन घनिष्ठता ‘नैनीताल समाचार’ के ‘पौड़ी अंक’ के दौरान ही हुई। प्रश्न:- उनकी राजनीति [...]
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लेखक : राजेन्द्र सिंह रावत 'राजू' :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
[राजेन्द्र रावत ' राजू' द्वारा लिखा गया यह लेख 15 से 31 अक्टूबर 1982 के नैनीताल समाचार में प्रकाशित हुआ था। उनके द्वारा लिखे गये अन्य लेख पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें ] (शोलापुर चादरों के लिये विख्यात शहर है। परंतु पौड़ी के उन आदमियों के लिये जो जन्मांध श्रीनिवास नारायण करदास को जानते [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
(प्रशासन के लिए सरदर्द और जनता के लिए आतंक का पर्याय बन चुके उत्तराखण्ड के 29 कुख्यात नरभक्षियों को मात्र नौ वर्ष की अवधि में, अपनी बंदूक का निशाना बनाने वाले शिकारी लखपत सिंह मूलतः शिक्षक हैं। प्रस्तुत है उनसे देवेश जोशी की छवीं बथ। ) प्रश्न:- कलम और पुस्तक एक शिक्षक के स्वाभाविक साथी [...]
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लेखक : लक्ष्मण सिंह नेगी :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
गढ़वाली लोक संस्कृति का लोहा मनवाने वाले चन्द्र सिंह राही आज भी आज भी अपने काम में जुटे हैं। प्रस्तुत हैं देहरादून में गढ़वाल सभा में इस संस्कृतिकर्मी से लक्ष्मण सिंह नेगी की छवीं बथ के अंश – प्रश्न:- अपने निजी जीवन के बारे में कुछ बतायें। उत्तर:- मेरा जन्म 1947 को गिवाली गाँव पौड़ी [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
अपने व्यावसायिक जीवन में मुख्य रूप से आर्किटेक्ट रहे लखनऊ कला विद्यालय (वास्तुकला) के स्टूडेण्ट डी. एल. साह एक उम्दा चित्रकार भी हैं। रंगो की तीव्रता को छोड़कर उदासी के रंग अगर विनसेण्ट वॉन गॉग के कैनवासों को चढ़ा दिए जाएँ तो लैण्डस्केप के आकारों और ब्रश के स्ट्रोक्स से डी. एल. साह भी वॉन [...]
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