पत्रकार एसोसिएशन का सम्मेलन
ग्रामीण पत्रकार एसोसिशन के चौथे वार्षिक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विधान सभा अध्यक्ष हरवंश कपूर ने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ बताया। देहरादून में 15 फरवरी 2008 को हुए ग्रामीण पत्रकार एसोसियेशन के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि आपात्काल के दौरान कई अखबारों ने [...]
प्रशान्त राही के बाद अब खीमराज सिंह को प्रताड़ित करती पुलिस
6 जनवरी को मेरे पास एक फोन आया, ‘‘मैं खीमा का पिता बोल रहा हूँ सोमेश्वर से। क्या नहीं पहचान रहे हो ?’’ पहली मर्तबा मैं सचमुच नहीं पहचान पाया था। फोन करने का कारण पूछा तो काँपती आवाज में बोले, ‘‘पुलिस वाले रोज दबिश दे रहे हैं और कह रहे हैं कि खीमा को [...]
विज्ञापन लुटा कर भ्रष्टाचार छिपा रहा है हरिद्वार विकास प्राधिकरण
वर्ष 1986 में गठित हरिद्वार विकास प्राधिकरण अभी तक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर ही चर्चाओं में रहा है। पिछले कुछ वर्षों से यह विज्ञापनों के जरिये पत्र-पत्रिकाओं को उपकृत कर वह अपने कारनामों पर पर्दा डालने की मुहिम चलाये हुए है। प्राधिकरण का विज्ञापन मद का खर्चा विगत तीन वित्तीय वर्षों में ही 17 [...]
पत्रकार की शामत
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में बिहार के एक विधायक अनंत कुमार की गुंडागर्दी तथा पत्रकार के साथ मारपीट का नजारा सभी ने टीवी पर देखा। इधर देहरादून में पत्रकारों के साथ अमरमणि त्रिपाठी के समर्थकों तथा जेल कर्मचारियों के दुर्व्यवहार को ज्यादा समय नहीं बीता था कि रामनगर [...]
यों लुटता है सरकारी खजाना
प्रस्तुति : मनीश भगत बाजारवाद के सामने पत्रकारिता ने घुटने टेक दिये हैं। अखबार निकालने का धंधा खूब फल-फूल रहा है। लेकिन इस धंधे को पनपाने में निजी उद्योगों व व्यापार जगत ने ही नहीं, हमारी सरकारों ने भी मदद की है। अपने टुच्चे हित साधने के लिये राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार की सूचना [...]
नैनीताल समाचार की अनदेखी से सकते में हैं दिल्ली के पत्रकार
प्रस्तुति : जितेन्द्र भट्ट नैनीताल समाचार का नाम उत्तराखंड के सूचना विभाग द्वारा आधिकारिक सूचना निदर्शिनी से काट दिये जाने की घटना से राजधानी दिल्ली के पत्रकार भी अत्यन्त चिन्तित हैं। उत्तराखंड राज्य आंदोलन से करीब से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी मानते हैं कि उत्तराखंड में सरकार ने हमेशा ही छोटे और क्षेत्रीय [...]
जातिवादी सोच में अबला का दर्द भी दब गया
उत्तराखंड में समाज के तमाम वर्ग धर्म व जातिवाद के गहरे दलदल में समाते जा रहे हैं। अब तो पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। पत्रकारिता के निःस्वार्थ और मिशन होने का दावा कुछ पत्रकारों की करनी से नेपथ्य में जाने लगा है। इस भयानक बुराई के चलते बागेश्वर का एक पत्रकार पिछले दिनों बर्बाद [...]
पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन का अधिवेशन सम्पन्न
पर्वतीय पत्रकार एसोसियेशन के गैरसैंण में 1-2 नवम्बर 07 को संपन्न द्वितीय प्रांतीय अधिवेशन में पत्रकारों को तहसील व ब्लॉक स्तर पर मान्यता देने, प्रत्येक तहसील में प्रेस भवन बनाने, दीक्षित आयोग को भंग कर गैरसैंण को राजधानी घोषित करने तथा बी.एम.बी. मोटर मार्ग को तलवाड़ी व नारायणबगड़ गैरसैंण मोटर मार्ग का निर्माण शीघ्र करने [...]
मुख्यमंत्री जी, बतायें तो कि हमारी हैसियत क्या है ?
सेवा में, श्री भुवन चन्द्र खंडूरी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड, देहरादून महोदय, एक मुख्यमंत्री के रूप में आप इतने व्यस्त होंगे कि यदि यह मेरे लिये अपमान और आक्रोश का मामला न होता और सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग का प्रभार आपके पास नहीं होता तो शायद यह पत्र लिखने की मूर्खता मैं न करता। लेकिन इस [...]
संग्रामी पत्रकारों की याद
नई दिल्ली के प्रेस क्लब में पिछले दिनों आयोजित एक कार्यक्रम में सन 1857 की महान क्रांति में अहम भूमिका निभाने और देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले पत्रकार शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर आजादी की पहली जंग में शहीद हुए ‘देहली उर्दू अखबार‘ के संपादक मौलवी बाकर [...]
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