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लेखक : रोहित जोशी :: :: वर्ष :: :January 18, 2012 पर प्रकाशित
यह समागम गिर्दा के बहाने ही संभव था। साहित्य, संगीत, रंगमंच और अन्य विविध कलाकर्मों में दखल के साथ ही जनपक्षीय राजनीति में भी सक्रिय रहे गिर्दा ही इनसे जुडे़ उत्तराखंड के महत्वपूर्ण लोगों को साथ जुटा सकते थे। सो ‘पहाड़’ के बैनर तले ये लोग गिर्दा को याद करने 23 और 24 दिसम्बर को [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 16, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज (गतांक से आगे) कपिलेश:- आपने अपने गीत में कहा है- ‘भोट माङणी च्वाख-चुपाड़ा जतुक छन/रात-स्यात सबनै की जेडि़या भै नाल।/उनरै सुकरम त पिड़ै रैईं आज/ आजि जाँणि अघिलि काँ जाँलें पेड़ाल !!’’…मौजूदा दौर में आपको किनसे उम्मीद है ? गिर्दा:- मित्र, रास्ता तो जनसंघर्षों का ही है। अन्ततः तो आपकी आस्था जनसंघर्षों पर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 28, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज यों तो पिछले तीन दशकों में गिर्दा से समय-समय पर समाज, साहित्य, राजनीति और समसामयिक हलचलों पर विस्तृत बात-चीत बहस होती ही रही। बातचीत में उन्होंने जो-जो कहा, वह सब स्मृति में तो बना रहा लेकिन भेंटवार्ता के रूप में मैं कभी उसे व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं कर पाया। कुछ समय पहले [...]
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लेखक : शिरीष कुमार मौर्य :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 23, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज का हिंदी साहित्य में हस्तक्षेप पुराना है। उनका नाम बीस बरस पहले मैं वर्तमान साहित्य के सम्पादक मंडल में देखता था। उनकी कुछ कहानियाँ मैंने पढ़ीं। फिर ये जाना कि वे एक बेहद सक्रिय और समर्पित राजनैतिक कार्यकर्ता रहे हैं। इसे मेरी लिखत-पढ़त की सीमा ही माना जाए कि उनकी कविताओं से मेरा [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 12, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज क्या सचमुच गिरदा नहीं रहे ? …..कहाँ, शरीर उनका जरूर तिरोहित हो गया है, लेकिन जनता से एकाकार हुए और उसके दुःख-दर्द, गुस्से व संघर्ष को वाणी देने वाले गिरदा जैसे जनपक्षी रचनाकार कभी मरते नहीं, क्योंकि जनता के जिस सपने को उन्होंने जिया, वह सपना कभी नहीं मरता….मर नहीं सकता… 1975 में [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 11, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : राजीव जोशी साहित्य, संगीत, कला जैसे विविध क्षेत्रों में रचनात्मकता का माहौल तैयार करने और जनपक्षीय साहित्य की समझ पैदा करने के उद्देश्य से 18 व 19 जून को पिथौरागढ़ के नगरपालिका सभागार में ‘रचनात्मक शिक्षक मण्डल’ व ‘विहान’ परिवार की ओर से ‘सृजनोत्सव 2010’ का आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य वक्ता [...]
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लेखक : महेश पुनेठा :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
ब्रजेंद्र लाल साह ने उत्तराखंड की लोक विरासत को सहेजने-सँवारने और देश-दुनियाँ तक पहुँचाने का अविस्मरणीय कार्य किया। लोक संस्कृति को एक नयी पहचान तथा सांस्कृतिक आंदोलन को एक नयी गति दी। लोक संस्कृति के विकास के लिये एक पूरी पीढ़ी तैयार की। उनके लिए लोक साहित्य मनोरंजन का साधन मात्र नहीं, बल्कि जन चेतना [...]
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