अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2012 – 1
[समयाभाव के कारण यह पूरा अंक दो भागों में अपलोड किया गया है, असुविधा के लिये खेद है। कृपया पूरा पढें। ] पहाड़ की जमीन कम्पनियों को : हरिश्चन्द्र चन्दोला पहाड़ के गाँवों के गरीब किसानों की कृषि भूमि अभी भी सरकार तथा निजी कंपनियाँ सस्ते दामों में ले रहे हैं। मैं जोशीमठ नगर से [...]
सर्वशक्तिशाली और सर्वव्यापी हैं तराई-भाबर के गलेदार
पूर्वी छोर गौला नदी के किनारे से कटघरिया तक 10 किलोमीटर और काठगोदाम से तीन पानी तक 14 किमी, कुल 140 वर्ग किलोमीटर के इस दायरे में फैले हल्द्वानी शहर की घोषित आबादी तीन लाख के करीब है। इसमें किराये में रहने वालों की सही संख्या का आंकलन नहीं हो पाया है। हर मुहल्ले में, [...]
जमीन बेचने को वे हजारों पेड़ काट सकते हैं
पिछले दिनों नैनीताल के नजदीक के गाँवों में घूमते हुए यह समझ में आया कि बाहर से ही लोग यहाँ आकर जमीनें नहीं खरीद रहे हैं, बल्कि गाँवों में भी दलालों की एक फौज तैयार हो गई है, जो बाहर से आने वालों को पकड़ कर जमीनें बेच रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि [...]
पेड़ काटो, जुर्माना दो, मकान बनाओ
कमल जगाती पेड़ काटो चालान कराओ और घर बनाओ ! यही हो रहा है नैनीताल में। वन विभाग के द्वारा लगभग साठ मामलों में अवैध निर्माण की सूचना प्राधिकरण को दी गई थी। कई मामलों में लोगों ने अपने प्लाट में से पेड़ ही गायब कर दिए। पकडे़ गये लोगों के चालान हुए, जिसे भुगत [...]
सल्ट में भू माफिया
पहाड़ों से पलायन और गाँवों के वीरान होने का सिलसिला लगातार जारी है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड में भी एक ओर गाँवों की आबादी घटती जा रही है, दूसरी ओर बाहर से आये पूँजीपति गाँवों में धड़ल्ले से जमीनें खरीद रहे हैं। राज्य गठन के 11 साल के भीतर 62 बाहरी लोगों ने जमीनें [...]
तराई में संगठित अपराध के रूप में उभरता भूमाफिया
अनिल सिंह राणा खटीमा में भूमाफिया पूरी तरह से सक्रिय है। वह पुलिस व प्रशासन की सह पर जनजाति (थारुओ) की भूमि पर जबरन कब्जा करता है। विरोध करने पर झूठे मुकदमे लगा कर फँसाय व डराया-धमकाया जाता है। अधिक विरोध करने पर गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। पीडि़त पक्ष की कोई [...]
सम्पादकीय : माफिया का खेल और माननीय न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस निर्णय, जिसमें अदालत ने प्रदेश में भूमि खरीद की सीमा तय करने के लिये बने कानून को निरस्त कर दिया था, पर रोक लगाने से उत्तराखंड आन्दोलनकारियों और सभी प्रबुद्ध लोगों ने राहत की साँस ली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला आते ही भू माफिया की बाँछें खिल [...]
भू कानून की मौत
प्रस्तुति :हरीश भट्ट उत्तराखंड में भूमि का मसला अत्यन्त महत्वपूर्ण है। 87 प्रतिशत पर्वतीय भूभाग वाले राज्य में भूमि इतनी कम है कि वह बढ़ती जनसंख्या और नगरों-कस्बों के विकास की जरूरतों को पूर्ण करने में असमर्थ है। आज जिस जमीन पर माफियाओं, नौकरशाहों व राजनेताओं की नजरें हैं, उसे मानव के रहने योग्य बनाने [...]
क्यों बना यह निगोड़ा उत्तराखण्ड ?
क्यों बना होगा यह उत्तराखण्ड ? क्या ऐसा नहीं हो सकता कि एक ऐसा जलजला आये कि यह पूरी तरह नेस्तनाबूद हो जाये…..इसके एक करोड़ निवासी, यहाँ की 53,483 वर्ग किमी. जमीन, 35,394 वर्ग किमी. जंगल, यहाँ के 15,761 गाँव, 165 नगर-कस्बे…? क्या जरूरत है कि इस सबका अस्तित्व रहे ? जब आपकी कोई अस्मिता [...]
पहाड़ की भूमि पर तो और भी ललचायी नजरें हैं
उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों, जो अब उत्तराखंड राज्य बन गए हैं, में सबसे पहले सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण का काम आरंभ हुआ था। उसके विरुद्ध आंदोलन भी देश में सबसे पहले यहीं शुरू हुआ था। इसका आरंभ हुआ था टिहरी बाँध बनने के प्रस्ताव पर 1970 के दशक में, जब पता लगा कि इन [...]
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