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लेखक : सूरज कुकरेती :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 31, 2011 पर प्रकाशित
पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा उत्तराखंड में चार नये जिलों, रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री व कोटद्वार के गठन की घोषणा के बाद जश्न का माहौल है तो कोटद्वार में कई किसानों को अपनी जमीनों से हाथ धोने का भी डर सता रहा है। यहाँ जिला मुख्यालय को लेकर भी विवाद चल पड़ा है। कोटद्वार जिले [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 15, 2011 पर प्रकाशित
प्रस्तुति :हरीश भट्ट उत्तराखंड में भूमि का मसला अत्यन्त महत्वपूर्ण है। 87 प्रतिशत पर्वतीय भूभाग वाले राज्य में भूमि इतनी कम है कि वह बढ़ती जनसंख्या और नगरों-कस्बों के विकास की जरूरतों को पूर्ण करने में असमर्थ है। आज जिस जमीन पर माफियाओं, नौकरशाहों व राजनेताओं की नजरें हैं, उसे मानव के रहने योग्य बनाने [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 15, 2011 पर प्रकाशित
क्यों बना होगा यह उत्तराखण्ड ? क्या ऐसा नहीं हो सकता कि एक ऐसा जलजला आये कि यह पूरी तरह नेस्तनाबूद हो जाये…..इसके एक करोड़ निवासी, यहाँ की 53,483 वर्ग किमी. जमीन, 35,394 वर्ग किमी. जंगल, यहाँ के 15,761 गाँव, 165 नगर-कस्बे…? क्या जरूरत है कि इस सबका अस्तित्व रहे ? जब आपकी कोई अस्मिता [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 24, 2010 पर प्रकाशित
विद्या भूषण रावत उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रदेश सरकार से एक वर्ष के भीतर उधमसिंह नगर के एस्कॉर्ट फार्म की सीलिंग कानून के तहत घोषित की गई 1163.42 एकड़ का नियमानुसार प्रबंधन करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने यह निर्णय नई [...]
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लेखक : ए.पी. घायल :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 31, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों में चकबन्दी की माँग को लेकर विगत तीन दशकों से संघर्षरत पौड़ी गढ़वाल की असवालस्यूँ पट्टी के ग्राम सूला निवासी गणेश सिंह नेगी ‘गरीब’ गाँव-गाँव भ्रमण कर लोगों को लामबंद कर रहे हैं। पेश है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश। सवाल:- अधिकांश जनता चकबंदी से अनभिज्ञ है, ऐसा क्यों ? [...]
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लेखक : संजीव भगत :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
विकास की स्पष्ट दिशा निर्धारित न होने के कारण उत्तराखण्ड राज्य के कई क्षेत्रों में हालात उत्तर प्रदेश के समय से भी बदतर हो गये हैं और प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसका नुकसान उत्तराखण्ड राज्य की जनता को उठाना पड़ रहा है। वनों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। उत्तराखण्ड के लगभग 23 [...]
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लेखक : पुरुषोत्तम शर्मा :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
अभी हाल में उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के लिए एक नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया है। इस मसौदे में क्या है यह तो पता नहीं पर इसे तैयार करने का काम जिस तरह किया गया वह पूरी तरह आपत्ति करने लायक है। राज्य के लिए नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया जा [...]
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