लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 31, 2011 पर प्रकाशित
अनिल सिंह राणा खटीमा में भूमाफिया पूरी तरह से सक्रिय है। वह पुलिस व प्रशासन की सह पर जनजाति (थारुओ) की भूमि पर जबरन कब्जा करता है। विरोध करने पर झूठे मुकदमे लगा कर फँसाय व डराया-धमकाया जाता है। अधिक विरोध करने पर गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। पीडि़त पक्ष की कोई [...]
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लेखक : कालिका प्रसाद काला :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 31, 2011 पर प्रकाशित
कालिका प्रसाद काला ‘मानस’ उत्तराखंड में कृषि भूमि को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। पहली, नाप भूमि या ‘जैड. ए. खतौनी लैण्ड’ और दूसरी बेनाप। नाप भूमि या ‘मेजर्ड लैण्ड’ पर कृषकों को भूमिधरी अधिकार दिए गये हैं। पहले नाप भूमि से सम्बन्धित कानून अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग थे, किन्तु [...]
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लेखक : बची बिष्ट :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
नैनीताल के आसपास की कुछ नीची पहाड़ियों पर पर्यटन विकास के नाम पर कृषि भूमि को रातोंरात व्यावसायिक बनाकर उनमें होटल और बिक्री के लिये कॉटेज बनाये जा रहे हैं। भीमताल का ज्यादातर क्षेत्र ऐसे भवनों से ढँक चुका है। रामगढ़, धारी विकासखण्डो में बड़े बिल्डरों ने पहाड़ियों पर निर्माण जारी रखा है। इन लोगों [...]
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लेखक : श्याम देउपा :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
थारुओं की जमीन का मामला भारत-नेपाल सीमा से लगी तराई की पट्टी में थारू एवं गैर थारू लोगों के बीच वर्षों से चला आ रहा भूमि विवाद गहराता जा रहा है। जनजाति के लोग मानते हैं कि गैर थारू भू-माफिया ने ऊँची राजनैतिक पहुँच और दादागिरी के बूते उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया है। [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : रैमाशी रावत जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये हमें संगठित होना पड़ेगा। यदि हम सत्ता से उम्मीद लगाकर आगे चलना चाहेंगे तो सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। यह कहना था स्वामी अग्निवेश का। वे उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में ‘वैश्वीकरण के दौर में ‘जल, जंगल, [...]
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