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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
शंकर सिंह राणा पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं ने एकजुट होकर शराब के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। मगर चमोली जिले के दशोली ब्लॉक में महिलाओं का शराब के धंधे में लिप्त पाया जाना हैरान करने वाला है। यहाँ महिलायें इस अवैध कारोबार से जुड़ी हैं। आबकारी विभाग के अनुसार चालू वर्ष में अब [...]
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लेखक : मयंक पांडे :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 1, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में शराब के खिलाफ महिलाओं की लड़ाई अनवरत जारी है। दशकों पहले दीपा देवी ने शराब की जिस दुकान को आग लगाई थी, वह अभी तक जल ही रही है। दीपा बाद में शराब के खिलाफ लड़ने वाली टिंचरी माई के नाम से मशहूर हुई। महान क्रांतिकारी श्रीदेव सुमन की माता तारा देवी से [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 8, 2011 पर प्रकाशित
क्या परिसीमन करवायेगा एक और राज्य आन्दोलन? उत्तराखण्ड राज्य बने दस वर्ष हो चुके हैं। लेकिन आज भी कुछ प्रश्न उठ रहे है। आखिर राज्य की मांग क्यों की गई ? राज्य बनने के पश्चात सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक लाभ किसे हुआ। क्या फिर पहाड़वासियों का शोषण होता रहेगा ? या एक नये उत्तराखण्ड आन्दोलन [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 8, 2011 पर प्रकाशित
बदलाव का असर पौड़ी पर भी पड़ा है। संचार माध्यमों व आधुनिकता की बयार ने यहाँ की रवायतों, संस्कृति व सम्बन्ध तक को धो कर रख दिया है। अब यहाँ के समाज में वह आत्मीयता नहीं दिखती है और न वह परम्पराओं को आगे बढ़ाने को इच्छुक हैं जो वर्षों से चली आ रही थीं। [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
संसद में खेलें एक घड़ी (मथुरा में खेलें एक घड़ी की तर्ज पर) संसद में खेलें एक घड़ी, संसद में खेलें एक घड़ी काहे के सिर पर मुकुट विराजै, काहे के सिर पर है पगड़ी ।। संसद में… ‘सोनिया‘ के सिर पर मुकुट विराजै, ‘मनमोहन‘ के सिर पर है पगड़ी ।। संसद में… काहे के [...]
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लेखक : घनश्याम जोशी :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
होली शब्द सुनते ही मन में शरारत और हरारत एक साथ शुरू हो जाती है। रंगों का यह त्यौहार कुछ ऐसा ही है। लेकिन मेरे गाँव की होली तो अजीब थी। हर घर में होली का त्यौहार मिट्टी, गोबर तथा कीचड़ के पानी को एक-दूसरे पर डालकर मनाया जाता था। मुझे लगता है तब गाँव [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
हेम चन्द्र लोहनी मेरा बचपन अल्मोड़ा से 16 मील दूर सतराली में बीता। सतराली की होली प्रसिद्ध थी। बसन्त पंचमी से होली गायन आरम्भ होता था। ढोलक में जौ चढ़ाकर रात्रि में किसी चौपाल में अलाव के आगे होली गाई जाती थी। बच्चे दिन में लकड़ी के बड़े टुकड़े एकत्रित करते। ये गीत वैष्णवपदी होते [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
बसन्त आ गया है। पतझड़ वाले आड़ू-पयाँ के वृक्षों पर नई कोंपल आ गई हैं, लक्-दक् फूल खिल चुके हैं, एक नया जीवन नया राग-रंग नई उमंग संग लेकर बसन्त आ गया है। तिड़ा हुआ मुँह फटे हुये पैर भयभीत करती शीतलहर, दुःखों के बाद सुख का ऐहसास एक नया जीवन नया राग-रंग नई उमंग [...]
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लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
बसन्त के आगमन के साथ ही लोगों के जीवन में एक बहार सी आने लगी है। प्रकृति मनों को रिझाने में लगी है। मन में उमंग व उल्लास के भाव जाग रहे हैं। होठों में मधुर संगीत उतर आया है। होली आने में अभी वक्त है लेकिन होली के बोल अनायास होठों पर आने लगे [...]
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लेखक : महेश पुनेठा :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
विद्यालय जाते जीप में स्टाफ के बीच रोज किसी न किसी विषय पर कोई न कोई चर्चा शुरू हो ही जाती है। विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई, प्रबंधन से लेकर देश-दुनिया की राजनीति, समाज, संस्कृति चर्चा के विषय बन जाते हैं। आज की चर्चा कुमाउनी होली को लेकर चल पड़ी। हमारे एक शिक्षक साथी गिरजा शंकर जोशी [...]
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