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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 28, 2011 पर प्रकाशित
‘आ तुझको मैं सैर कराऊँ, घर में घुसकर क्या लिखता है ?’ ऐसा तो बाबा नागार्जुन लिख गए हैं। लेखकों की भीरुता पर उनका ये तंज तब था, जब अभिव्यक्ति के दूसरे बायपास, जैसे ब्लॉग व सोशल नेटवर्किग साइट्स, लेखकों की पहुँच में नहीं थी। अब कुछ लोग कहने लगे हैं कि घर में बैठकर [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 17, 2011 पर प्रकाशित
नगर में किया गया रचनाकर्म (ग) वर्तमान शताब्दी के प्रथम दशक में नगर में मात्रात्मक दृष्टि से सबसे अधिक पुस्तकों का लेखन हुआ। तकनीक के सर्वसुलभ होने व लिखने वालों का आगे आना भी इसका एक कारण रहा। सन् 2000 से 2011 के बीच कई प्रकार की विधाओं में पुस्तकें प्रकाशित हुईं। कविता संग्रह, कहानी, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 1, 2011 पर प्रकाशित
‘चमत्कार’ नन्दकिशोर हटवाल की दस बालोपयोगी कहानियों का संग्रह है, जिसमें रोचक ढंग से बच्चों को बहुत सी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। आग, बाढ़, भूकम्प, पहाड़ों पर यातायात, पहाड़ी औरत की जिन्दगी, आपदा प्रबन्धन आदि बेहद जरूरी बातों पर लिखी गई ये कहानियाँ बच्चों को जरूरी संस्कार और जीवन दृष्टि देने में तो सक्षम [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 31, 2011 पर प्रकाशित
आजादी पूर्व के दौर में पौड़ी में रहते हुए जहाँ लेखकों ने इतिहास, संस्कृति पर लिखा वहीं आजादी के बाद लेखकों ने लेखन की दूसरी विधाओं यथा कविता, कहानी, गजल, दोहा, गीत संग्रह, काव्य संग्रह को आजमाया तो संस्कृति, इतिहास, भूगोल, पर्यावरण आदि पर विषयगत पुस्तकों का भी प्रकाशन हुआ। हालांकि कुछेक को छोड़ अधिकतर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 9, 2011 पर प्रकाशित
करीब सात-आठ साल पहले, मटियानी जी की मृत्यु के बाद साहित्य अकादेमी ने मटियानी जी के संपूर्ण साहित्य का मोनोग्राफ तैयार करने का मुझे काम सौंपा। उनकी मौत से मैं तीन-चार साल तक उबर नहीं पाया था, इसलिए कुछ भी लिख नहीं पाया। बड़े प्रयत्नों के बाद जब उसका आरंभिक हिस्सा ‘कथादेश’ में छपा तो [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :March 3, 2011 पर प्रकाशित
पहाड़ का शीतल, शान्त व सुकून भरा वातावरण रचनाधर्मिता के लिये मुफीद माना जाता है। यही कारण है कि हिल स्टेशनों से लगातार लिखा जाता रहा है। ऊटी, डलहौजी, शिलांग, दार्जलिंग, शिमला से अनेक पुस्तकों की रचनायें हुई। कुछ के लेखक स्थानीय थे तो कई के लेखक यहाँ के आकर्षण से खिंच कर इन पहाड़ों [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 11, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : राजीव जोशी साहित्य, संगीत, कला जैसे विविध क्षेत्रों में रचनात्मकता का माहौल तैयार करने और जनपक्षीय साहित्य की समझ पैदा करने के उद्देश्य से 18 व 19 जून को पिथौरागढ़ के नगरपालिका सभागार में ‘रचनात्मक शिक्षक मण्डल’ व ‘विहान’ परिवार की ओर से ‘सृजनोत्सव 2010’ का आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य वक्ता [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :December 1, 2008 पर प्रकाशित
साहित्य को समाज का दर्पण यूं ही नहीं कहा जाता बल्कि समाज के बीच से ही कोई व्यक्ति अपने समाज के सुख-दुःख को अपनी भावनाओं में अभिव्यक्ति देता है और श्रेष्ठ साहित्य का जन्म होता है। इतिहास साक्षी है कि वर्षों से साहित्य समाज का प्रमुख अंग बना हुआ है। आज के बदलते दौर में [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008:: वर्ष :: 31 :June 14, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : किरीट मन्द्रियाल मेरे सामने समीक्षा के लिए रखे हैं तीन उपन्यास, जिनके लेखक हैं रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, जो उत्तराखंड की वर्तमान सरकार में केबिनेट मंत्री भी हैं। पहली निगाह डालते ही जिस बात ने सबसे ज़्यादा आकर्षित किया, वह है किताबों के फ्लैप पर लेखक का परिचय। इस परिचय में लेखक के मंत्री [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2008:: वर्ष :: 31 :May 31, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : शीला रजवार महिला समाख्या, हिन्दी विभाग कुमाऊँ विश्व विद्यालय तथा महादेवी सृजन पीठ, उमागढ़, नैनीताल के संयुक्त तत्वावधान में एक त्रिदिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘हमारा समाज और साहित्य में महिलाएं’ विषय पर केन्द्रित गोष्ठी का उद्देश्य समाज में महिलाओं की स्थिति से साहित्यकारों से रूबरू कराना तथा यह आँकलन करना था [...]
Posted in विविध, सांस्कृतिक गतिविधियां | Tagged hindi literature, literature, litrary meet, mrinal pandey, shekhar pathak, women |
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