चिट्ठी-पत्री : जनता जागरूक बने और सक्रिय सहभागिता निभाये
हमें आपका नैनीताल समाचार समय-समय पर मिलता रहता है। आपके अखबार में बहुत अच्छी व रोमांचक खबरें पढ़ने को मिलती रहती हैं। आशा करते हैं आगे भी मिलती रहेंगी। कुँवर सिंह नेगी सम्पादक, ‘गढ़ गौरव’, कोटद्वार नैनीताल समाचार में दन्तेवाड़ा की ‘शान्ति-न्याय यात्रा’ का तुम्हारा वृतान्त पढ़ा। अच्छा लगा कि तुमने इतना बड़ा जोखिम उठा [...]
चिट्ठ्ठी – पत्री : कहीं कुछ टूट गया है
प्रमोद जोशी के अचानक स्मृति शेष हो जाने के बारे में वीरेन डंगवाल की भावांजलि पढ़कर स्तब्ध रह गया। समझ में नहीं आया कि ये कौन से प्रमोद जोशी हैं। जब चित्र को ध्यान से देखा तो स्मृतियों में प्रमोद दा उभर आये। उनसे पहले असगर वजाहत ने उनके बारे में विस्तार से लिखा, लेकिन [...]
चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक जी आग लगना कुदरती घटना नहीं है
15 से 30 अप्रेल के अंक के संपादकीय के द्वितीय पैराग्राफ की पहली तीन पंक्तियों ‘‘जंगलों की आग से होने वाले नुकसान की समीक्षा करना यहाँ मतलब नहीं है। यह एक कुदरती चीज़ है। अतः हो सकता है कि इससे प्रकारान्तर में जंगलों के पुनर्सृजन में कुछ मदद भी मिलती हो।’’ को कई बार पढ़ने [...]
चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक नैनीताल समाचार के नाम खुला खत
आपका सम्मानित पाक्षिक (15-30 अप्रैल 2010) का अंक मुझे कुछ साथियों ने उपलब्ध कराया। आपकी ओर से अक्सर मुझे यह समाचारपत्र मिल जाता था, पर इस बार जानबूझकर, या अनजाने यह महत्वपूर्ण अंक मुझे डाक से अब तक नहीं मिला। आप जानते होंगे कि पिछले कुछ वर्षो से आपसे तथा आपके अखबार से मेरा कोई [...]
चिट्ठी पत्री : शम्भू जी की वल्गर तरंग
होली अंक में शम्भू जी की तरंग कुछ ज्यादा ही वल्गर हो गयी। ऐसा लगा पढ़कर कि वे उत्तराखंड के सोद्देश्य पाक्षिक में न लिखकर अपने चौकड़ी के चार यारों को अपने दिनों का किस्सा सुना रहे हों। चलो, फिर लिखने वाले ने लिख दिया। मगर समाचार का एक सम्पादक भी तो है। उसकी भूमिका [...]
चिट्ठी-पत्री : निष्पक्ष पत्रकारिता का पर्याय नैनीताल समाचार
क्या गांधी की शहादत संस्थाओं का पेट भरने हेतु है ‘नैनीताल समाचार’ का ताजा अंक मिला। पिछले अंक में हरीश जोशी के आलेख और अरण्य रंजन की प्रतिक्रिया पढ़ी। पहली बात तो हरीश जोशी और ‘नैनीताल समाचार’ को मीडिया कहना बेईमानी है। ये दोनों ही नाम जन सरोकारों से जुड़े हैं। मीडिया तो वह है [...]
चिट्ठी पत्री : पूर्व निर्धारित मानसिकता के आधार पर सिर्फ खुन्दक न निकालें !!
‘नैनीताल समाचार’ के प्रथम पृष्ठ पर हरीश जोशी का ‘‘ये तमाम गैरसरकारी संस्थायें कर क्या रही हैं?’’ लेख देखा तो उत्सुकता से पूरा पढ़ डाला। पूरे लेख में एक खुन्नस जैसी लगी। मुझे यह अपेक्षा थी कि किसी गम्भीर मुद्दे पर स्वैच्छिक संगठनों का ध्यान आकृष्ट कराने या फिर किसी जनमुद्दे पर स्वैच्छिक संगठनों की [...]
चिट्ठी-पत्री : पद+दायित्व-लालबत्ती=सरकारी खजाने के सेहतमंद दीमक
समस्त नैनीताल समाचार परिवार को नव वर्ष व मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें। कुछ समय पहले आपके ही माध्यम से नैनीताल समाचार का वजूद उत्तराखंड की सूचना निर्देशिका से नकारने का समाचार मिला तो कोई बहुत हैरानी नहीं हुई। आज के इस कमीशनखोर, चाटुकारिता वालों और सर्वत्र भ्रष्टाचार मय दीमकों के युग में एक ईमानदार [...]
चिट्ठी पत्री: जोर जबर्दस्ती से क्या सच्चाइयाँ छुपाई जा सकेंगी ?
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के एस.एस. जीना परिसर अल्मोड़ा में ‘दखल’ द्वारा आयोजित पुस्तक मेले में पुस्तकों को पैरों से कुचलने का मामला स्तब्ध करने वाला है। उत्तराखंड देश में साक्षरता प्रतिशत के आँकड़ों में श्रेष्ठ है और यह राज्य के निवासियों के लिये गर्व का विषय है। परन्तु इसी राज्य में पुस्तकों को कुचलने की कार्यवाही [...]
चिट्ठी-पत्री : सरकार की मान्यता से जरूरी जनता की मान्यता है
‘नैनीताल समाचार’ के लिये यह गर्व का विषय है कि पिछले 30 वर्षों से जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता लगातार बढ़ती गई है। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में समाचार पत्रों की ही नहीं, चैनलों की भी बाढ़ आ गई है। लेकिन ‘नैनीताल समाचार’ का महत्व कम नहीं हुआ। आज मुझे एक खबर की पुष्टि [...]
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