लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 17, 2011 पर प्रकाशित
इस पखवाड़े चर्चा में आयी तीन प्रमुख घटनाओं से देश का मौजूदा परिदृश्य समझने में मदद मिलती है। केन्द्र सरकार ने खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को अनुमति देने का निर्णय किया है। इसका न सिर्फ समाज के प्रबुद्ध लोगों और आन्दोलनकारी संगठनों ने विरोध किया है, बल्कि पक्ष-विपक्ष के सभी राजनैतिक दल, जो [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 19, 2011 पर प्रकाशित
जीवन चन्द पुलिस द्वारा माओवादियों का जोनल कमांडर बता कर जेल भेज दिये गये प्रशांत राही की अन्ततः पौने चार साल बाद 21 अगस्त को रिहाई हो गई। उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा मिली जमानत के बाद पर जिला कारागार रोशनाबाद (हरिद्वार) से छोड़ा गया। इस अवसर पर उनकी पत्नी चन्द्रकला और पुत्री शिखा राही के [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया के सबसे दुर्दांन्त आतंकवादी के मारे जाने की घटना मनुष्य के साहस और वीरता से अधिक युद्ध और जासूसी के क्षेत्र में तकनीकी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन यह मानना बचकाना है कि ओसामा के मरने से दुनिया में आतंकवाद खत्म हो जायेगा। यदि हम इस्लामी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 28, 2010 पर प्रकाशित
विजय वर्द्धन उप्रेती हेम के बारे में कभी लिखूँगा। वह भी उसकी शहादत के बाद उसके इतिहास पर…। सपने में भी नहीं सोचा था। कैसे हो गया सब कुछ एक झटके में ? अभी भी लगता है कि कोई बहुत बुरा सपना देखा था, जिसका असर कुछ ज्यादा ही रह गया। लेकिन नहीं झकझोर देने [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 01 || 15 अगस्त से 31 अगस्त 2010:: वर्ष :: 34 :September 13, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में लोहारीनाग पाला जल विद्युत परियोजना का निर्माण बंद कर दिया गया है। उड़ीसा में वेदान्ता कम्पनी को खनन करने से रोक दिया गया है। उ.प्र. में किसानों के जबर्दस्त प्रतिरोध के बाद केन्द्र सरकार भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के लिये विवश हो गई है। पन्द्रह साल पहले बहुत जोर-शोर से जिस आर्थिक [...]
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लेखक : बबीता उप्रेती :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 19, 2010 पर प्रकाशित
मैं लड़ूँगी हेम…… तुम्हीं ने सिखाया था… तुम फूलों को कुचल सकते हो, पर उनकी खुशबू को फैलने से कभी नहीं रोक सकते 30 जून की सुबह हवा अपेक्षाकृत ठंडी थी। मैं सुबह उठ गयी थी। मैंने हेम को चाय के साथ उठाया। वह हमेशा ही सुबह उठ जाते। उन दिनों कुछ थकान भी थी। [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: :: वर्ष :: :July 16, 2010 पर प्रकाशित
सरकार माओवाद का कोई इलाज ढूँढ नहीं पाई है कि कश्मीर उबलने लगा है। सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाये जाने से एक के बाद एक नौजवानों की मृत्यु के बाद उपजे गुस्से ने धीरे-धीरे सारी घाटी में पैर पसार लिये हैं। अलगाववादियों द्वारा किये जाने वाले बंद के आह्वान के बाद दहशत के मारे आये [...]
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लेखक : ग़िरिजा पांडे :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
पिछले कुछ समय से देश के आदिवासी इलाकों में जारी संघर्ष ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिखाया है कि आजाद भारत की सरकारों ने न कभी अपने सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास को समझना उचित समझा और न ही उससे कुछ सबक लेना चाहा है। आजादी के छः दशक बीत जाने के बाद भी [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 29, 2010 पर प्रकाशित
बापू साम्प्रदायिक हिंसा की लपटों को बुझाने के लिये जब नोआखाली में नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे थे और उग्रवादी मुस्लिम कट्टरपंथी उनके रास्ते पर काँटे, काँच के टुकड़े और विष्ठा बिछा रहे थे, तब क्या उन्हें पुलिस की मदद की जरूरत पड़ी थी ? लेकिन हम गांधी नहीं हो सकते थे, इसलिये हमें पड़ी, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: :: वर्ष :: :May 27, 2010 पर प्रकाशित
देवाषीष प्रसून एक तरफ, वर्षों से शोषित व उत्पीड़ित आदिवासी जनता ने माओवादियों के नेतृत्व में अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नाकाफी समझते हुये हथियार उठा लिये हैं। दूसरी तरफ, असंतोष के कारण उपजे विद्रोह के मूल में विद्यमान ढाँचागत हिंसा, लचर न्याय व्यवस्था, विषमता व भ्रष्टाचार को खत्म करने [...]
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