अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2012 – 1
[समयाभाव के कारण यह पूरा अंक दो भागों में अपलोड किया गया है, असुविधा के लिये खेद है। कृपया पूरा पढें। ] पहाड़ की जमीन कम्पनियों को : हरिश्चन्द्र चन्दोला पहाड़ के गाँवों के गरीब किसानों की कृषि भूमि अभी भी सरकार तथा निजी कंपनियाँ सस्ते दामों में ले रहे हैं। मैं जोशीमठ नगर से [...]
बेखौफ हैं खनन के तस्कर
सुशील खत्री बाढ़ आदि के खतरों को देखते हुए हर वर्ष जुलाई माह से सितंबर तक खनन के कार्य पर प्रशासनिक रोक रहती है। पट्टाधारकों को इस बात की जानकारी भी दी जाती है। लेकिन खनन माफिया द्वारा इन नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। रामगंगा नदी से इन दिनों भारी मात्रा में अवैध [...]
खनन : विनाश भी, रोजगार भी
पहाड़ों से उतरती नदियाँ भाबर में सिंचाई के लिये नहरों में बँध जाती हैं। बरसात में ये नदियाँ बाढ़ के साथ रेता-बजरी का पुनर्भरण कर देती हैं। कोसी, दाबका, गौला, सूखी (नन्धौर) नदियों का बहुत बड़ा क्षेत्र रेता, बजरी, पत्थर चुगान के लिये वर्ष में 6 माह खुलता है। इस दौरान लाखों टन रेता, बजरी, [...]
सुमगढ़ आपदा की बरसी पर छलका जिलाधिकारी का दर्द
बीते वर्ष 18 अगस्त को सुमगढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में 18 नौनिहालों की मृत्युका एक साल पूरा हो गया। इस हादसे की बरसी पर बागेश्वर के श्रमजीवी पत्रकार संगठन ने एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे बागेश्वर के जिलाधिकारी सी.एस. नपलच्याल ने जिस तरह अपना दर्द छलकाया, उसके [...]
माफियाओं की लाइफलाईन गौला ने बिन्दुखत्ता को टापू बना दिया है
गौला नदी, जो माफियाओं के लिए वरदान है, नैनीताल जिले के बिन्दुखत्ता क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थायी शोक का कारण बन गयी है। नदी में प्रतिवर्ष आने वाले उफान से यहाँ के किसानों की खेती को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बिन्दुखत्ता के रावतनगर, इन्द्रानगर, खुरीयाखत्ता, शीशम भुजिया और श्रीलंका टापू सहित दर्जनों गाँव [...]
बहुतु कठिन है डगर पनघट की…
वह एक अजीब दृश्य था। चैनल उसे सनसनीखेज बनाना चाहते थे और वह लगातार हास्यास्पद होता चला जा रहा था। एंकर चिल्ला-चिल्ला कर वाहियात सवाल पूछ रहे थे और मौके पर मौजूद रिपोर्टर उनसे भी ज्यादा चिल्लाकर जवाब दे रहे थे। कुल मिला कर चिन्ता नहीं पैदा होती थी, बल्कि हँसी से लोटपोट होने का [...]
तो ऐसी रही बागेश्वर जनपद की विकास यात्रा
उत्तराखंड राज्य के गठन से पूर्व ही सितंबर 1997 में बागेश्वर जिले की स्थापना हो गई थी। तब से जिले का विकास मंथर गति तथा अनियोजित रूप से हो रहा है। राज्य बनने के बाद आशा की एक किरण दिखाई दी थी, लेकिन सत्ता का सुख भोग रहे नेताओं ने जिले की सुध नहीं ली। [...]
कटाल्डी खनन प्रकरण: खनन माफियाओं के साथ न्यायपालिका से भी संघर्ष
टिहरी गढ़वाल के कटाल्डी खनन विरोधी आन्दोलन से जुड़े वन पंचायत सरपंच कलम सिंह खड़का, स्व. कुँवर प्रसून व मेरे सिर पर पाँच साल से न्यायालय की कथित अवमानना के जुर्म की सिविल जेल की सजा लटकती रही, जिसे जिला न्यायाधीश टिहरी गढ़वाल ने अन्ततः 25 अक्टूबर 2009 को निरस्त कर दिया। 2002 के आरंभ [...]
अभी तो खड़िया से आँखें चौधियायी हैं
प्रस्तुति : पंकज कुमार कांडपाल काण्डा पड़ाव एक छोटी सी बाजार है, जहाँ पर राशन-पानी से लेकर बर्तन, सब्जियाँ, टी.वी. सेट, कैमरा, फोटो स्टूडियो, दवाइयाँ इत्यादि उपलब्ध हो जाती हैं। इस क्षेत्र के कई गाँवों में से एक गांव है ‘बजीना’। काण्डा पड़ाव से इस गाँव के आधे रास्ते तक मोटर सड़क पहुँच चुकी है। [...]
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