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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 19, 2011 पर प्रकाशित
रामस्वरूप सिंह चौहान विकसित सभ्यता के इस दौर में ऐसा लगता है, जैसे मनुष्य प्रत्येक प्रकार की विपदाओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। जबकि ऐसा है नहीं। पहले जब मनुष्य प्रकृति के घनिष्ठ सम्पर्क में रहता था, तब उसे शायद आने वाली विपदाओं का पूर्वाभास हो जाता था। पशु-पक्षियों में आज भी इस [...]
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लेखक : पुरुषोत्तम शर्मा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 19, 2011 पर प्रकाशित
पुरुषोत्तम शर्मा उत्तराखण्ड आपदा एवं पुनर्वास नीति 2011’ एकदम निराशाजनक है। इसमें भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए आधुनिक सूचना तकनीकी का अधिकतम इस्तेमाल और आपदा पीडि़तों के स्थायी पुनर्वास के साथ उनके पुश्तैनी रोजगार की सुरक्षा के मुद्दे अहम होने थे। अखिल भारतीय किसान महासभा [...]
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लेखक : प्रेम पंचोली :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
यमुनोत्री से लेकर जमुना पुल तक लगभग 90 किमी. और गंगोत्री से लेकर धरासू तक लगभग 120 किमी. का रास्ता इन दिनों अत्यन्त संवेदनशील है। अब तक दोनों तीर्थो के मार्ग नहीं खुल पाये हैं। बाहर से आये तीर्थ यात्री तो परेशान हैं ही, स्थानीय लोगों की भी मुसीबतें कम नहीं है। उत्तरकाशी जनपद के [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
आँकडे़ बतलाते हैं कि पूरे विश्व के स्तर पर 6 प्रतिशत की दर से आपदाएँ बढ़ रही हैं और इसमें मरने वाले 80 प्रतिशत गरीब तथा 20 प्रतिशत अमीर लोग होते हैं। मगर तथाकथित विकास योजनाओं से हम कितनी आपदाओं को जन्म दे रहे हैं, इस पर हमारा ध्यान भी नहीं जाता। गाड़-गधेरों में लापरवाही [...]
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लेखक : बृजेन्द्र लुण्ठी :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
पूरे भारतवर्ष में उत्तराखण्ड तीसरा राज्य है, जहाँ आपदा की घटनाओं से निपटने के लिए अलग विभाग गठित किया गया है। ऑस्ट्रेलियन मॉडल पर गठित किया गया यह विभाग आपदाओं के प्रति जनजागरूकता के नाम पर करोड़ों रुपये की बर्बादी कर रहा है। इस सीमान्त में आपदाओं का लम्बा इतिहास है। 1977 में तवाघाट में [...]
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लेखक : सतीश जोशी 'सत्तू' :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
इस साल अतिवृष्टि से जन हानि की सूचनाएँ कम हैं, लेकिन करोड़ों रुपए की सरकारी एवं निजी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। अकेले चंपावत जिले में ही सौ करोड़ रुपए से अधिक की क्षति का आंकलन अब तक किया जा चुका है। जिला मुख्यालय एवं विभिन्न तहसील मुख्यालयों में बनाए गए आपदा नियंत्रण कक्षों में [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
ईश्वर जोशी विगत वर्ष की अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में सरकार द्वारा किये गये प्रयास निराशाजनक रहे हैं। भविष्य में होने वाली किसी आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके, इसके लिए भी सरकार गम्भीर नहीं दिखायी देती। तमाम सरकारी दावों की पोल अतिवृष्टि के मात्र दो माह [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी फटने, भूस्खलन, जमीन के धँसने, हिमस्खलन के अतिरिक्त मौसम परिवर्तन और तापमान बढ़ने से अंधड़, बाढ़, सूखा, दुर्भिक्ष आदि के रूप में आपदाएँ आती हैं। कुमाऊँ विश्वविद्यालय में भू विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. चारु चन्द्र पन्त बताते हैं कि हिमालय की चार हजार किमी. श्रृंखला अत्यधिक संवेदनशील है। पृथ्वी की नवीनतम [...]
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लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 17, 2011 पर प्रकाशित
राज्य में गठित आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण इकाई ने इन दस सालों में जो एकमात्र काम किया, वह था दो सौ गाँवों को भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील घोषित करना। मगर यह तंत्र आपदा के मुहाने में बसे गाँवों के लिए कोई कारगर योजना नहीं बना पाया और जमीन का प्रबंध न हो पाने से [...]
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लेखक : chandrasekhart :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 16, 2011 पर प्रकाशित
वर्ष 1868 में चमोली जनपद में बिरही की सहायक नदी में भूस्खलन से भारी तबाही हुई और 73 लोग मरे। 19 सितम्बर 1880 नैनीताल में शेर का डाण्डा की पहाड़ी टूटने से 151 लोग मरे। इसी दौरान शारदा में आयी बाढ़ से बरमदेव नाम का पड़ाव बहा, कोसी की बाढ़ से भुजान से रामनगर तक [...]
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