लेखक : महेश जोशी :: अंक: 21 || 15 जून से 31 जून 2008:: वर्ष :: 34 :July 23, 2011 पर प्रकाशित
इस बार पहाड़ में प्रकृति का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। इस साल जंगलों में धधकती आग के बदले ओलावृष्टि व विनाशकारी आँधी- तूफान की खबरें प्रमुख हैं। वैसे अप्रेल-मई में ओलावृष्टि या अंधड़ असामान्य नहीं हैं। यह ‘चल वसन्त’ कहलाता है। लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ ऐसी घटनायें कम होती चली [...]
Posted in विविध | Tagged global warming, nature, rain, storm, uttarakhand weather, uttrakhand rains, weather, पर्यावरण |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 21, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : हरीश फुलारा राज्य बनने से पूर्व भारत सरकार द्वारा इस पर्वतीय क्षेत्र के विकास हेतु पहले पृथक पर्वतीय विकास परिषद तथा बाद में पर्वतीय विकास मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत धनराशि की व्यवस्था की जाती थी। मगर वह पैसा उ. प्र. के मैदानी जिलों में व्यय कर दिया जाता था और पर्वतीय क्षेत्र उपेक्षित रह [...]
Posted in जंगल, विविध | Tagged development, forest, forest law, nature, पर्यावरण |
लेखक : पिंकी रावत :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 21, 2009 पर प्रकाशित
ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है, जब हमें अपने गाँव-देहात या शहर के नुक्कड़ों पर कुदरत के सफाईकर्मी कहे जाने वाले गिद्धों के दर्शन आसानी से हो जाते थे। आज इस विशाल पक्षी के गायब हो जाने से पर्यावरण पर गंभीर खतरा मँडरा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक अस्सी के दशक में भारत में साढे़ [...]
Posted in पर्यावरण, विविध | Tagged birds, diclofinek, himalayan griffon, lamargear, nature, uttarakhand, vulture |
लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 8, 2009 पर प्रकाशित
माटू जनसंगठन ने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिख कर लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना को रद्द करने की मांग की है। पत्र में जयराम रमेश के उस वक्तव्य की तरफ ध्यान दिलाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस परियोजना का काम रोक दिया गया है और उनका मंत्रालय सभी [...]
Posted in उर्जा, जल, भ्रष्टाचार, विविध | Tagged court verdict, government, hydro power, hydro power projects, nature, पर्यावरण |
लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
शनिवार, 8 अगस्त की प्रातः ढाई बजे मुनस्यारी तहसील के दाफा में हुई तबाही का मंजर अन्य लोग तो भूल ही जायेंगे, लेकिन जिन लोगों के दिल के टुकडे़ उस जगह दफ्न हो चुके हैं, उनका इस हादसे को ताउम्र भुला पाना मुमकिन नहीं हो सकेगा। यहाँ बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन से ला, [...]
Posted in आपदा, जनमवार अंक, विविध, विशेषांक | Tagged birthday edition-09, cloudburst, death, education edition, jhekla, la, landslide, munsyari, natural disaster, nature, panelia, शिक्षा अंक |
लेखक : महेश बवाड़ी :: अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :December 1, 2008 पर प्रकाशित
एक बार फिर जीप सरपट उतार पर दौड़ रही थी। गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। खाने का असर अब नींद के रूप में हो रहा था। हम एक- दूसरे के कंधों पर टिक या एक-दूसरे को धकेलते हुए झपकियाँ ले रहे थे, मगर मनिया मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम दे रहा था। सेराघाट [...]
Posted in पर्यटन, यात्रायें | Tagged kalamuni, mynsyari trip, nature, travel, travel diary |
लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008:: वर्ष :: 31 :June 14, 2008 पर प्रकाशित
कई महीनों से उत्तराखंड सरकार राज्य में आपदा प्रबंधन के कार्यक्रम चला रही थी। कर्मचारियों तथा संस्थाओं को आपदा का मुकाबला करने की शिक्षा दे रही थी कि आपदा के समय लोगों को बचाने के लिये क्या-क्या करना चाहिये। यहाँ तीन ही मुख्य आपदायें आती हैं: भूकंप, भूस्खलन और मोटर गाड़ियों की दुर्घटनायें। भूकंप तो [...]
Posted in आपदा, विविध | Tagged accidents, disaster-management, natural disaster, nature |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2007:: वर्ष :: 31 :November 1, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : हेम भट्ट भारत के शीत जल मत्स्यिकी संसाधन की बात की जाय तो इसमें उत्तराखंड का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्तराखंड में शीतजल मत्स्यिकी संसाधनों को भू सूचना प्रणाली के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। हिमालयी क्षेत्र के साथ-साथ कुमाऊँ की तराई के तुमड़िया, हरीपुरा बौर, बैगुल, धौरा, शारदा, नानक सागर आदि में [...]
Posted in पर्यावरण, विविध | Tagged cold water fish cultivation, employment, enterprenurship, government policies, nature |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2007:: वर्ष :: 31 :November 1, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : पंकज कुमार कांडपाल काण्डा पड़ाव एक छोटी सी बाजार है, जहाँ पर राशन-पानी से लेकर बर्तन, सब्जियाँ, टी.वी. सेट, कैमरा, फोटो स्टूडियो, दवाइयाँ इत्यादि उपलब्ध हो जाती हैं। इस क्षेत्र के कई गाँवों में से एक गांव है ‘बजीना’। काण्डा पड़ाव से इस गाँव के आधे रास्ते तक मोटर सड़क पहुँच चुकी है। [...]
Posted in पर्यावरण, विविध, ज़मीन | Tagged environment article, mining, nature |
लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2007:: वर्ष :: 31 :October 15, 2007 पर प्रकाशित
पिंडारी ग्लेशियर हिम संग्राहक क्षेत्र के दाहिनी ओर स्थित छाँगुछ शिखर (6322 मी.) अभियान में कैम्प 3 में एवलांच आ जाने से दार्जिलिंग निवासी अंगछीना शेरपा व मीयका शेरपा की मौत हो गयी तथा उनका एक साथी पिंबा शेरपा घायल हो गया। भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के तत्वावधान में भारतीय नौ सेना के सदस्यों सहित 18 [...]
Posted in आपदा, विविध | Tagged death, mountainerring, natural disaster, nature, trekking |
पृष्ठ 1 कुल 2 पृष्ठों में..पृष्ठ : 12»
आपकी टिप्पणीयाँ