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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 19, 2011 पर प्रकाशित
जीवन चन्द पुलिस द्वारा माओवादियों का जोनल कमांडर बता कर जेल भेज दिये गये प्रशांत राही की अन्ततः पौने चार साल बाद 21 अगस्त को रिहाई हो गई। उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा मिली जमानत के बाद पर जिला कारागार रोशनाबाद (हरिद्वार) से छोड़ा गया। इस अवसर पर उनकी पत्नी चन्द्रकला और पुत्री शिखा राही के [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया के सबसे दुर्दांन्त आतंकवादी के मारे जाने की घटना मनुष्य के साहस और वीरता से अधिक युद्ध और जासूसी के क्षेत्र में तकनीकी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन यह मानना बचकाना है कि ओसामा के मरने से दुनिया में आतंकवाद खत्म हो जायेगा। यदि हम इस्लामी [...]
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लेखक : शमशेर सिंह बिष्ट :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 8, 2011 पर प्रकाशित
एक जमाने के कुमाऊँ के प्रसिद्ध नक्सलवादी नेता बहादुर सिंह धपोला 10 मार्च 2011 को कोटमन्या में अपने स्थाई निवास में सुबह-सुबह योग करते हुए, अपने नश्वर शरीर को यहीं छोड़कर अपनी चिर स्थाई महायात्रा में चल दिये। यह खबर जब मिली तो यकीन नहीं हुआ क्योंकि आज भी 69 वर्ष की उम्र में 40 [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 10, 2011 पर प्रकाशित
रमा पाण्डे ‘‘गणतंत्र अपने बच्चों को मारने की इजाजत नहीं देता।’’ सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय मेरे लिए एक उम्मीद की किरण की तरह है। मैं अपने बेटे के हत्यारों को फाँसी के फंदे पर लटका हुआ देखना चाहती हूँ। उन अनेक लोगों के लिए यह फैसला थोड़ा अजीब होगा, जो अब तक केवल एक [...]
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लेखक : बबीता उप्रेती :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 19, 2010 पर प्रकाशित
मैं लड़ूँगी हेम…… तुम्हीं ने सिखाया था… तुम फूलों को कुचल सकते हो, पर उनकी खुशबू को फैलने से कभी नहीं रोक सकते 30 जून की सुबह हवा अपेक्षाकृत ठंडी थी। मैं सुबह उठ गयी थी। मैंने हेम को चाय के साथ उठाया। वह हमेशा ही सुबह उठ जाते। उन दिनों कुछ थकान भी थी। [...]
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लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 28, 2010 पर प्रकाशित
उसने मेरी बैठक में टँगे पोस्टर में छपी कविता को पढ़ा – वह मारे जायेंगे ……. जो सच-सच बोलेंगे कत्ल कर दिये जायेंगे जो विरोध में बोलेंगे जो गुन नहीं गायेंगे मारे जायेंगे सबसे बड़ा अपराध है इस समय निहत्थे और निरपराध होना जो अपराधी नहीं होंगे मारे जायेंगे पोस्टर में सत्ता द्वारा मारे गये [...]
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लेखक : ग़िरिजा पांडे :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
पिछले कुछ समय से देश के आदिवासी इलाकों में जारी संघर्ष ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिखाया है कि आजाद भारत की सरकारों ने न कभी अपने सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास को समझना उचित समझा और न ही उससे कुछ सबक लेना चाहा है। आजादी के छः दशक बीत जाने के बाद भी [...]
Posted in विविध | Tagged dantewada, government policies, history, maoism, naxal movement, tribal laws, tribal neglect |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 29, 2010 पर प्रकाशित
बापू साम्प्रदायिक हिंसा की लपटों को बुझाने के लिये जब नोआखाली में नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे थे और उग्रवादी मुस्लिम कट्टरपंथी उनके रास्ते पर काँटे, काँच के टुकड़े और विष्ठा बिछा रहे थे, तब क्या उन्हें पुलिस की मदद की जरूरत पड़ी थी ? लेकिन हम गांधी नहीं हो सकते थे, इसलिये हमें पड़ी, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: :: वर्ष :: :May 27, 2010 पर प्रकाशित
देवाषीष प्रसून एक तरफ, वर्षों से शोषित व उत्पीड़ित आदिवासी जनता ने माओवादियों के नेतृत्व में अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नाकाफी समझते हुये हथियार उठा लिये हैं। दूसरी तरफ, असंतोष के कारण उपजे विद्रोह के मूल में विद्यमान ढाँचागत हिंसा, लचर न्याय व्यवस्था, विषमता व भ्रष्टाचार को खत्म करने [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 15, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : कुमार प्रशांत सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण ने पूछा था कि अपने तथाकथित जनप्रतिनिधियों की मूर्खताओं को झेलने के लिये हम कब तक अभिशप्त बने रहेंगे ? इसके जवाब में तब देश को आपातकाल और उन्हें चंडीगढ़ की कैद मिली थी। यह अनुत्तरित सवाल दिन-प्रतिदिन तीखा से तीखा होता जा रहा है। ताजा [...]
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