इस तरह बीस साल बाद पौड़ी कहाँ होगा ?
25 मार्च 2010 को पूरे बीस साल बाद मैं पौड़ी (गढ़वाल) में था। सन् 1988 में युवा और जोशीले पत्रकार उमेश डोभाल की हत्या के बाद पत्रकारों-संस्कृतिकर्मियों-समाजसेवियों के लम्बे संघर्ष से अपराधी कटघरे में आने लगे थे और 25 मार्च 1990 को उत्तराखण्ड के पत्रकारों ने पहला उमेश डोभाल स्मृति समारोह पौड़ी में आयोजित किया [...]
महिला अदालत: न वकील न जज, न्याय फटाफट
भारत की न्याय व्यवस्था पर अनगिनत टिप्पणियाँ की जा चुकी हैं। नैनीताल की धारी तहसील में स्थानीय महिलाओं ने जर्जर न्याय व्यवस्था के विकल्प के रूप से अपने बूते पर, आपसी समझदारी व सुलह पर आधारित न्याय की नयी व्यवस्था की स्थापना करने की पहल की है। इस आंदोलन के विविध पहलुओं पर आधारित एक [...]
आशल – कुशल 15 मार्च से 31 मार्च 2010
होली के उत्साहजनक महौल में शुरू हुआ पखवाड़ा फाल्गुनी हवा के बजाय जल्दी ही गर्मी की तपिश देने लगा। कृषि और ग्रामीण विकास में पीछे रह गए उत्तराखंड के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नबार्ड) ने 589.3 अरब रुपए की ऋण योजना तैयार की है। पहाड़ी इलाकों के लिए मडुआ, राजमा, बेमौसमी सब्जियों, [...]
पौड़ी की दु:खती रग है – इसकी उपेक्षा
प्रस्तुति : अरविंद मुद्गल जिला पंचायत परिसर में खड़े होकर पौड़ी को निहारते एक विधायक को कहते सुना- ‘‘कौन कहता है कि पौड़ी में विकास नहीं हुआ ? जहाँ देखो भवन ही भवन हैं और शहर के ऊपर इतना बड़ा विकास भवन है। यह विकास नहीं तो और क्या है ?’’ विधायक जी की विकास [...]
‘सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति’
गढ़वाली लोक संस्कृति का लोहा मनवाने वाले चन्द्र सिंह राही आज भी आज भी अपने काम में जुटे हैं। प्रस्तुत हैं देहरादून में गढ़वाल सभा में इस संस्कृतिकर्मी से लक्ष्मण सिंह नेगी की छवीं बथ के अंश – प्रश्न:- अपने निजी जीवन के बारे में कुछ बतायें। उत्तर:- मेरा जन्म 1947 को गिवाली गाँव पौड़ी [...]
आशल-कुशल 01 से 15 अक्टूबर
गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की माँग को लेकर ‘गैरसैंण राजधानी संयुक्त मोर्चा’ ने आन्दोलन तेज कर दिया है। वन मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने बचदा के स्थान पर भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार विधिवत संभाल लिया है। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने दिल्ली में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण [...]
साठ साल पुराने पौड़ी की यादें
मैं अपने गाँव दोलिंडा से 60 साल पहले पढ़ने के लिये पौड़ी आया था। तब पौड़ी छोटा और बहुत ही सुन्दर था। वहाँ तब दो हाईस्कूल थे, एक अमेरिकन प्रेसिबेटेरियन चर्च द्वारा संचालित मेसमोर और दूसरा डी. ए. वी.। मेसमोर पुराना और प्रसिद्ध था, जिसमें पढ़ने के लिये विद्यार्थी सुदूर सीमान्त क्षेत्रों तक से आते [...]
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