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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 29, 2010 पर प्रकाशित
बापू साम्प्रदायिक हिंसा की लपटों को बुझाने के लिये जब नोआखाली में नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे थे और उग्रवादी मुस्लिम कट्टरपंथी उनके रास्ते पर काँटे, काँच के टुकड़े और विष्ठा बिछा रहे थे, तब क्या उन्हें पुलिस की मदद की जरूरत पड़ी थी ? लेकिन हम गांधी नहीं हो सकते थे, इसलिये हमें पड़ी, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: :: वर्ष :: :May 27, 2010 पर प्रकाशित
देवाषीष प्रसून एक तरफ, वर्षों से शोषित व उत्पीड़ित आदिवासी जनता ने माओवादियों के नेतृत्व में अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नाकाफी समझते हुये हथियार उठा लिये हैं। दूसरी तरफ, असंतोष के कारण उपजे विद्रोह के मूल में विद्यमान ढाँचागत हिंसा, लचर न्याय व्यवस्था, विषमता व भ्रष्टाचार को खत्म करने [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008:: वर्ष :: 31 :June 14, 2008 पर प्रकाशित
निर्वासित तिब्बतियों के शांति मार्च यात्रा को पिथौरागढ़ के प्रशासन ने बाँस पटान में रोक दिया है और एक इंच भी आगे न बढ़ने देने की चेतावनी दी है। दल के संयोजक सहित छः प्रमुख नेताओं को हरिद्वार जेल भेज दिया गया है। उनके ट्रकों में से सामान उतरवा उन्हें बेरीनाग थाने पहुँचा दिया। लेकिन [...]
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लेखक : पेमा गेकिल सिथर :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2008:: वर्ष :: 31 :May 31, 2008 पर प्रकाशित
तिब्बत में चीनी शासन के 49वें विरोध दिवस के अवसर पर निर्वासित तिब्बतियों ने धर्मशाला (हिमांचल प्रदेश) से ‘जागो, प्रतिकार करो, वापस चलो’ नारे के साथ 10 मार्च 2008 को तिब्बत कूच के लिये पैदल शांति मार्च शुरू किया। 49 वर्ष पूर्व 1959 की 10 मार्च को ल्हासा में चीन सरकार के खिलाफ तिब्बतियों का [...]
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