कर्मठ और व्यवहारकुशल सामाजिक कार्यकर्ता हैं पूरन सिंह रावत
प्रस्तुति : मान सिंह रावत जिन्दगी के लम्बे सफर में मुझे 60 वर्षीय युवा जैसे कर्मठ, क्रियाशील, तीक्ष्ण बुद्धि, सरल और सौम्य पूरन सिंह रावत जैसे बिरले ही लोग मिले हैं। पट्टी गुजडू, पड़सोली गाँव निवासी विष्णु सिंह गोर्ला, पहाड़ों के उत्पादों पर नयी-नयी खोज करने वाले, प्रमुख गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। उन्हीं की [...]
अलविदा: महावीर प्रसाद गैरोला
मैं पहली बार टिहरी गया था। मुझे लेने के लिये चन्दवदनी देवी के पुजारी दाता राम भट्ट आये थे। मैं उस दिन बुद्धिबल्लभ डियूण्डी ‘सैनिक’ का मेहमान था। वे उन दिनों जाखणीधार विकास खंड के खंड विकास अधिकारी थे। टिहरी के पुराने बाशिंदे और एक अच्छे लेखक के रूप में जाने जाते थे। डियूण्डी जी [...]
मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी
सिर्फ एक महीने के भीतर पहले धर्मानंद उनियाल गये, फिर पीताम्बर डेवरानी ने साथ छोड़ा और अपने को सम्हाल पाते, इससे पहले ही हुकुम सिंह पँवार ने हमसे विदा ले ली। अचानक इन तीनों का जाना साहित्य, समाज और राजनीति के क्षेत्र में शून्यता पैदा कर गया। हुकुम सिंह पँवार का जन्म टिहरी जनपद के [...]
ए गमे दिल क्या करूँ
स्मृतिशेष ‘‘ए गमे दिल क्या करूँ, वहशते दिल क्या करूँ’’ जो इस गीत को फिल्मी गाने के रूप में जानते हैं उनके लिए देवरानी जी की याद में इन पक्तियों का इस्तेमाल शायद ओछा लगे। पर मज़ाज़ की इन पंक्तियों को जिन्होंने पीताम्बर देवरानी जी के मुँह से सुना होगा, वे शायद जानते होंगे कि [...]
अमर सिंह जैसे अन्वेषकों की आज भी जरूरत है
प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों का समुचित उपयोग न होने के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र आज भी औद्योगिक रूप से पिछड़े हुए हैं। कहा जाये तो एक शताब्दी पहले का समाज अधिक स्वावलम्बी था। तब संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं नवीन खोजों के लिये चिंतन भी समाज में कई स्तरों पर होता रहता था। ऐसा [...]
स्मृति शेष: इतिहासकार जसवंत सिंह नेगी
15 फरवरी जसवंत सिंह नेगी का पौड़ी में निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे और अविवाहित रहे। 30 साल तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पुरातन भारतीय इतिहास पढ़ाने के बाद कुछ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे। स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण उनके भतीजे उन्हें पिछले साल पौड़ी ले आए थे। वे अपने विद्याथियों [...]
व्हाट एन आइडिया जी ?
समर्थ मुनगली ने बता दिया कि अब नहीं लगेगा इंजेक्शन से डर एक छोटा सा विचार एक साथ क्रांतिकारी भी हो सकता है और व्यावसायिक रूप से अत्यन्त लाभप्रद भी। विज्ञान एवं तकनीकी के विकास के दौर में बार-बार महसूस किये गये इस सत्य को हल्द्वानी के समर्थ मुनगली ने 19 दिसम्बर 2007 को मुम्बई [...]
गुमनाम ही रहे स्वाधीनता संग्रामी मनोरथ पांडे ‘शास्त्री’
मैं तब बेरीनाग मिडिल स्कूल की पाँचवीं कक्षा का विद्यार्थी था। हमारी कक्षा के शिक्षक ‘पंडित जी’ का नाम शायद शिवदत्त जी था। पर ठीक से याद नहीं आता। वे कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले थे। लम्बी सी दाढ़ी थी। मृदु स्वभाव और मधुरभाषी। हमारी हिन्दी की पुस्तक साहित्य वाटिका, भाग-1 में एक [...]
अथक संग्रामी और प्रखर वक्ता थे गोविन्द बल्लभ पंत
जन्मदिन (10 सितम्बर) पर याद पंडित गोविन्द बल्लभ पंत में तिलक की देशभक्ति, महात्मा गांधी की शांतिप्रियता एवं सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति का समन्वय था। वे दूरदर्शी एवं कुशल प्रशासक थे। वृद्धावस्था के कारण उनका प्रकम्पित शरीर शिथिल दिखाई पड़ता था, परंतु उनकी कार्यशक्ति अद्भुत थी। उन्होंने अनेक जटिल समस्याओं को बड़ी कुशलता से [...]
आपकी टिप्पणीयाँ