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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 23, 2011 पर प्रकाशित
दिसम्बर 2003 की कोई रात थी। रात बिस्तर पर जाते पत्नी ने हुक्म दिया, ‘‘हाथ के दोनों पंजों के नाखूनों को रगड़ो। इस तरह से……।’’ इससे क्या होगा, मैंने पूछा। सिर में बाल उग आयेंगे, उनका जवाब था। मैं उपहास के साथ सो गया। अगली सुबह श्रीमती जी ने टी.वी. के पर्दे पर एक संन्यासी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 10, 2011 पर प्रकाशित
रमा पाण्डे ‘‘गणतंत्र अपने बच्चों को मारने की इजाजत नहीं देता।’’ सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय मेरे लिए एक उम्मीद की किरण की तरह है। मैं अपने बेटे के हत्यारों को फाँसी के फंदे पर लटका हुआ देखना चाहती हूँ। उन अनेक लोगों के लिए यह फैसला थोड़ा अजीब होगा, जो अब तक केवल एक [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: :: वर्ष :: :July 16, 2010 पर प्रकाशित
सरकार माओवाद का कोई इलाज ढूँढ नहीं पाई है कि कश्मीर उबलने लगा है। सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाये जाने से एक के बाद एक नौजवानों की मृत्यु के बाद उपजे गुस्से ने धीरे-धीरे सारी घाटी में पैर पसार लिये हैं। अलगाववादियों द्वारा किये जाने वाले बंद के आह्वान के बाद दहशत के मारे आये [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 22, 2010 पर प्रकाशित
राष्ट्रद्रोह के आरोप में करीब सवा साल से अधिक समय तक जेल में कैद रहने के बाद सामाजिक कार्यकर्त्री चन्द्रकला तिवारी को 7 मई को जमानत पर रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई पर 10 मई को क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा आर.डी.एफ. द्वारा उनका फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। अपनी प्रेस वार्ता में चन्द्रकला ने बताया [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
पोरबंदर…. पहली बार गुजरात आने का सुयोग मिला तो तय किया कि अपनी यात्रा वहीं से शुरू करूँगा, जहाँ से 140 वर्ष पहले महात्मा गाँधी ने अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी। उस वक्त तो जेहन में यह भी नहीं था कि वह तो 30 जनवरी का मौका होगा और हो सकता है कि गुजरात [...]
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लेखक : शमशेर सिंह बिष्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में बन रही जल विद्युत परियोजनाओं ने पर्यावरण को ही नहीं उत्तराखंड के आम जन जीवन को भी नारकीय बना दिया है। इसका लाभ सिर्फ राजनेता व ठेकेदारों को ही मिल रहा है। उत्तराखण्ड के आम आदमी के जीवन में खुशहाली तथा बड़े बाँधों का जबाव देने के लिये उत्तराखण्ड लोक वाहिनी व आजादी [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
कालाढूंगी कांड ने उत्तराखडं पर एक बहुत बड़ा उपकार तो कर ही दिया है। इसने पार्टीगत राजनीति का चेहरा पूरी तरह उघाड़ कर रख दिया है। अपने आँख-कान खुले रखने वाले जागरूक लोग तो पहले भी यह जानते ही थे कि आखिर क्यों ऐसे लोग लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम-प्रधान से लेकर सांसद तक के [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2008:: वर्ष :: 31 :April 30, 2008 पर प्रकाशित
संस्कारहीन होती जा रही होली अब रंग, अबीर-गुलाल से अधिक शराब को महत्व दिये जाने की वजह से हुड़दंग भर रह गयी है। शराब के प्रभाव से इसमें भाईचारा कम, मनमानी अधिक हो गई है। ऐसे में अनेक बार इसमें उल्लास कम अपराध ज्यादा होने लगते हैं। इसी तरह की एक खूनी होली में बागेश्वर [...]
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