Browse: Home / police attrocities
लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 9, 2011 पर प्रकाशित
उत्तरायणी के दौरान इस बार बड़ेत गाँव के रितेश सिंह की संदिग्धावस्था में मौत हो गई। उसका शव सरयू नदी के किनारे मिला। बताया जा रहा है कि 14 जनवरी को उसकी तहसील रोड में टैक्सी स्टैंड के पास कई महीनों से पड़ाव डाले बंजारों से उसकी कहा सुनी हो गई। मामला मारपीट में बदल [...]
Posted in अपराध, विविध | Tagged bageshwar, crime, increasing crime in bageshwar . police, liquor mafia, murder, police attrocities |
लेखक : बबीता उप्रेती :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 19, 2010 पर प्रकाशित
मैं लड़ूँगी हेम…… तुम्हीं ने सिखाया था… तुम फूलों को कुचल सकते हो, पर उनकी खुशबू को फैलने से कभी नहीं रोक सकते 30 जून की सुबह हवा अपेक्षाकृत ठंडी थी। मैं सुबह उठ गयी थी। मैंने हेम को चाय के साथ उठाया। वह हमेशा ही सुबह उठ जाते। उन दिनों कुछ थकान भी थी। [...]
Posted in विविध | Tagged babita upreti, false encounter, hem pandey, hem pandey encounter, maoism, naxal movement, police attrocities |
लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
21 जनवरी को बागेश्वर में प्रशासन के खिलाफ जनता का रौद्र रूप देखने को मिला। बौखलाई जनता, समुंद्र की लहरों की तरह उफान पर थी। प्रशासन किंकर्तव्य सा हो उठा। बमुश्किल जिलाधिकारी ने जनता को हत्यारों को पकड़ने के लिए आश्वस्त किया, तो जनता मानी। गरूड़ के पूर्व ब्लाक प्रमुख व राज्य आंदोलनकारी चतुर सिंह [...]
Posted in अपराध, विविध | Tagged bageshwar, crime, police attrocities |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2008:: वर्ष :: 31 :April 14, 2008 पर प्रकाशित
माओवाद के नाम पर उत्तराखंड में जनता के साथ कैसा छल किया जा रहा है, इसकी बानगी हमें तब मिली, जब हमने सूचना के अधिकार के तहत प्रदेश के गृह विभाग से प्रतिबंधित साहित्य आदि के बारे में कुछ जानकारियाँ माँगी और गृह विभाग को संतोषजनक जवाब देते नहीं बन पड़ा। इस जवाब से प्रदेश [...]
Posted in भ्रष्टाचार, विविध, सम्पादकीय | Tagged maoism, misuse of power, police, police attrocities, politics, rti, भ्रष्टाचार |
लेखक : सुनील रौतेला :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 14, 2008 पर प्रकाशित
6 जनवरी को मेरे पास एक फोन आया, ‘‘मैं खीमा का पिता बोल रहा हूँ सोमेश्वर से। क्या नहीं पहचान रहे हो ?’’ पहली मर्तबा मैं सचमुच नहीं पहचान पाया था। फोन करने का कारण पूछा तो काँपती आवाज में बोले, ‘‘पुलिस वाले रोज दबिश दे रहे हैं और कह रहे हैं कि खीमा को [...]
Posted in अपराध, भ्रष्टाचार, विविध | Tagged government, government attrocities in uttarakhand, journalism, kheemraj singh bora, maoism, police attrocities, prashant rahi |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 15, 2008 पर प्रकाशित
24 दिसम्बर को जब गुजरात में हिन्दुत्व के महानायक नरेन्द्र मोदी के अश्वमेध यज्ञ की खबरों से देश भर के अखबार भरे पड़े थे, उत्तराखंड के दो प्रमुख समाचार पत्रों में छपी एक दूसरी खबर से हम बुरी तरह खौफजदा हो पड़े। ‘माओवादियों का जोनल कमांडर गिरफ्तार’ शीर्षक से ऐसा लगा जैसे कोई फिदायीन आत्मघाती [...]
Posted in अपराध, विविध | Tagged government attrocities in uttarakhand, naxal movement, police, police attrocities, prashant rahi |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 15, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : भाष्कर, चंदन 17 दिसंबर 2007 का दिन उत्तराखंड के हितैषियों और आंदोलनकारियों के लिये मनहूस था, जब प्रशांत राही को एक झूठी साजिश के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। प्रशांत यों तो समूची मानवता की आवाज हैं, लेकिन उत्तराखंड के लोगों के लिये वे खास समर्पित कार्यकर्ता हैं। राज्य की पुलिस व प्रशासन [...]
Posted in अपराध, विविध | Tagged government attrocities in uttarakhand, naxal movement, police, police attrocities, prashant rahi |
पृष्ठ 1 कुल 1 पृष्ठों में..पृष्ठ : 1
आपकी टिप्पणीयाँ