पापा पास होते तो डिक्शनरी की जरूरत नहीं पड़ती थी
प्रस्तुति : रैमासी रावत राजेन्द्र रावत ‘राजू भाई’, भले ही यह नाम सुनते ही और किसी के सामने एक कवि, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी, बैंक कर्मचारी, कामरेड़, कर्मठ और जुझारू व्यक्ति की छवि आती हो पर मेरे लिये तो वे मेरे पापा जी थे। वे बहुत ही शान्त और सरल स्वभाव के थे। [...]
समाज को जीवन्त बनाने के लिये वे धीमी लौ जलाते रहे
राजू रावत का जाना उत्तराखण्ड की एकता के एक बड़े सूत्र का चल बसना है। नियति ने उनके लिए जो भूमिका तय कर रखी थी वो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से निभायी और जब उत्तराखण्ड राज्य जैसी चीज बन रही थी, तब वे अपनी भूमिका पूरी कर रिटायर हो रहे थे। पिछले छः सालों में बार-बार [...]
राजेन्द्र रावत ‘राजू’
पिता- सरोपसिंह रावत ग्राम- च्वींचा, पट्टी, नांदलस्यूँ, पौड़ी गढ़वाल माता- गोदावरी देवी जन्म तिथि- 12 जुलाई 1953, देहान्त- 15 दिसम्बर 2009 जन्म स्थान- बिजनौर हाई स्कूल- बिजनौर इन्टरमीडिएट- मेसमोर इन्टर कालेज से पौड़ी से 11वीं की परीक्षा पास करने के बाद प्रताप इन्टर कालेज, टिहरी से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की स्नातक- गणित, रसायन व [...]
थोड़े शब्दों में बड़ी बात कहने का हुनर …
( जनकवि गिर्दा के साथ योगेश पंत की बातचीत) प्रश्न:- आपकी पहचान राजेन्द्र रावत ‘राजू’ से कब हुई ? उत्तर:- उनके लेखन और देश के विभिन्न परिवर्तनकामी समूहों से उनके जुड़ाव के बारे में तो जानता था, उनसे मुलाकात भी थी। लेकिन घनिष्ठता ‘नैनीताल समाचार’ के ‘पौड़ी अंक’ के दौरान ही हुई। प्रश्न:- उनकी राजनीति [...]
उनके साथ रह कर मैंने धैर्य और सहिष्णुता का मतलब जाना
स्मृतिशेष: राजेन्द्र रावत ‘राजू’ यहाँ धारा रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक में प्रवेश करते ही अब नजरें राजू भाई को ढूँढने लगती हैं। मन नहीं मानता कि राजू भाई अब हमारे बीच नहीं रहे। राजू भाई मुफलिसी में बीते अपने बचपन को कभी भूले नहीं थे, जब पिता जी की बिजनौर में हत्या हो गई [...]
दगड्या, दगडू नि रैणो सदानी
एक जानलेवा बीमारी से लम्बे संघर्ष के बाद आखिकार राजू रावत का इस तरह हमारे बीच से चला जाना बड़ा दुखद अहसास है। समझ में नही आता, हम लोगों के बीच एक संघर्षशील साथी की जो जगह राजू खाली कर गया है, उसकी भरपाई कैसे हो पायेगी। कुमाऊँ मण्डल के पत्रकारों, आंदोलनकारियों व संस्कृतिकर्मियों से [...]
छ्वी बथ
[राजेन्द्र रावत ' राजू' द्वारा लिखा गया यह लेख 15 से 31 अक्टूबर 1982 के नैनीताल समाचार में प्रकाशित हुआ था। उनके द्वारा लिखे गये अन्य लेख पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें ] (शोलापुर चादरों के लिये विख्यात शहर है। परंतु पौड़ी के उन आदमियों के लिये जो जन्मांध श्रीनिवास नारायण करदास को जानते [...]
पहली बरसी पर सखा सत्यम को श्रद्धांजलि
[राजेन्द्र रावत ' राजू' द्वारा लिखा गया यह लेख 1 अगस्त 1984 के ‘नैनीताल समाचार’ में प्रकाशित हुआ था। उनके द्वारा लिखे गये अन्य लेख पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें ] सिविल लाइन्स, पौड़ी का इलाका। तीन कमरे और समकोण बनाता हुआ लगभग 6 फुट चौड़ा बरामदा। एक कमरे में मशीन, दूसरे में कागज, [...]
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