ईष्र्या, द्वेष और लालच की प्रवृत्ति पर चुटीला व्यंग्य है ‘पाणि’
नरेन्द्र कठैत गढ़वाली के उभरते हुए समर्थ रचनाकार हैं। 2003 मे डॉ. आशाराम’ के नाम से उनका गढ़वाली हास्य व्यंग्य नाटक प्रकाशित हुआ था। लेकिन 2006 में प्रकाशित हुए काव्य संग्रह ‘कुल्ला पिचकारी’ और इस वर्ष ‘पाणि’ खण्डकाव्य प्रकाशित हुआ है। नरेन्द्र कठैत गढ़वाली के उन गिने-चुने लेखकों में हैं जिन्होंने हर विधा में कलम [...]
नदी परियोजनायें: बेहतर विकल्प ढूँढें वैज्ञानिक और विशेषज्ञ
उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों पर 200 जल विद्युत परियोजनायें प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं को ‘रन ऑफ द रिवर’* कहा जा रहा है। मगर वास्तव में बाँध और तटबंधों द्वारा नदियों को एक के बाद एक सुरंगों में डाला जा रहा है। समूची घाटियों का पानी अब नदियों में नहीं, बल्कि सुरंगों में [...]
सौल कठौल :दूध माँगोगे खीर देंगे…कश्मीर माँगोगे चीर देंगे!
गलती तो हो ही गई थी….. हफ्तों के बाद खिली धूप के बावजूद मैं कुढ़ा हुआ था। लम्बी बरसात की सीलन मेरे शरीर में ही नहीं, दिमाग में भी घुस चुकी थी। ‘‘अंकल, मिठाई लीजिये,’’ उसकी आवाज ने ही मेरी तंद्रा भंग की। वह एक नवयुवक था और उसके हाथ में मिठाई का लिफाफा था। [...]
एक और आत्महत्या….
‘‘माँ अब भौत ह्नेगि…..अब नि सयेंदु…….मि जाणु छौं……।’’ चमोली पुल से आत्महत्या करने वाली सुमन भट्ट के मोबाइल द्वारा अपनी माँ श्रीमती विश्वेश्वरी देवी को कहे ये अन्तिम शब्द थे। 16 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन पूरा शहर भाई-बहिन के इस पवित्र त्यौहार को मना रहा था, लेकिन तभी चमोली थाने में सूचना पहुँची कि [...]
जल विद्युत परियोजनाओं पर श्वेतपत्र जारी करे उत्तराखंड सरकार
उत्तराखण्ड के अधिकांश गाड़-गधेरों पर छोटे-बड़े बाँध बनाने की तैयारी है। देशी-विदेशी कम्पनियों को परियोजनायें लगाने का न्यौता दिया जा रहा है। जा रहा है। निजी कम्पनियों के आने से लोगों का सरकार पर दबाव कम हो जाता है, लेकिन कम्पनी का लोगों पर दबाव बढ़ जाता है। दूसरी तरफ कम्पनी के पक्ष में स्थानीय [...]
आपकी टिप्पणीयाँ