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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 14, 2010 पर प्रकाशित
कुछ दिन पहले शाम के वक्त मैं जोशीमठ आ रहा था कि चुंगी के सड़क के किनारे एक बड़े से काले भालू को नीचे उतरने की तैयारी में देखा। इस साल भालू ने जोशीमठ में कई लोगों को हमला कर घायल किया है। मैंने भालू को देखने की बात और लोगों को भी बताई। तब [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
बहुत जल्दी ही हरिद्वार में कुम्भ मेला होने वाला है। उत्तराखंड सरकार बहुत प्रसन्न है कि उसे केन्द्र से 400 करोड़ रुपये की मदद सिर्फ हरिद्वार में संरचनात्मक विकास के मद में मिल गये हैं। लेकिन उस पतितपावनी गंगा की वास्तविक स्थिति क्या है, जिसमें हजारों श्रद्धालु नित्य स्नान करते हैं और करोड़ों लोग आगामी [...]
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लेखक : राधा बहन :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
मैं ऋषिकेश से व्याँसी, देवप्रयाग व श्रीनगर होते हुए बद्रीनाथ राजमार्ग से हेलंग तक व वहाँ से उर्गम घाटी के लिये जा रही थी। बसों, टैक्सियों, रेस्तराओं, पर्यटक केन्द्रों और शोरूमों पर हर जगह एक ही शब्द लिखा मिलता था ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’। बार-बार कर उभर-उभर कर आने वाला यह वाक्य मानो जबरन सिद्ध करने का [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 13, 2008 पर प्रकाशित
सेवाग्राम में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय नदी सम्मेलन के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सुप्रसिद्ध विद्वान मुकुन्द घारे ने कहा कि हालाँकि बापू की पुण्यस्थली यह कहने के लिये उचित जगह नहीं है, लेकिन यह सच है कि आज यदि मेरी आयु पच्चीस वर्ष की होती तो मैं नक्सलवादी होता। देश की [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : भास्कर पानी पर जनता का अधिकार सुनिश्चित करने के लिये स्वयंसेवी संगठनों की पहल पर उत्तराखंड की नदियों के किनारे जल यात्रायें निकाली जा रही हैं। तय कार्यक्रमानुसार लगभग पंद्रह नदियों के किनारे 1 जनवरी से शुरू हो रही यात्राओं का संगम 15 जनवरी को रामनगर में होगा। वहाँ 16 व 17 जनवरी [...]
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लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम। अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी, तुम तो पानी के व्योपारी, खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी, बिछी हुई [...]
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