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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 28, 2011 पर प्रकाशित
पिछ्ले अंक से आगे….. थोड़ा सरकने के बाद गाड़ी एक बार फिर जाम में फँस जाती है। इस बार सड़क पर डामर लगाया जा रहा है। सीजन में काम होना उतना जरूरी नहीं है, जितना कि काम होते हुए दिखना। सड़कें दुरुस्त रहनी चाहिये, वरना वी.आई.पी. गाड़ियों का ‘अलाइनमेंट’ आउट हो सकता है। अगर ऐसा [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 23, 2011 पर प्रकाशित
लो सपने संजोये जिसका इंतजार था, वो सीजन आ ही गया। सीजन कभी अकेला नहीं आता, अपने साथ कई फजीहतें भी साथ लाता है। मंत्री, संत्री, भिखारी, मदारी, सीजनल पुलिस और गिरहकटों के साथ-साथ ‘एफ टीवी’ से निकले लोग भी चले आते हैं। नैनीताल वाले हमेशा दुआ माँगते हैं कि इस बार सीजन में वी.आई.पी. [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 17, 2011 पर प्रकाशित
‘पूरे देश का कहना है अन्ना हजारे गहना है।’ ‘जब तक सूरज चांद रहेगा अन्ना तेरी बात कहेगा’, ‘अन्ना नहीं तू आंधी है, नये दौर का गांधी है।’ ये सारे नारे अन्ना हजारे के योगदान के बारे में हैं। हर कोई कमर कस कर आपके साथ जुड़ने को तैयार हैं। स्कूल भी बच्चों के हाथ [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
‘‘सुनो-सुनो। सभी राज्यवासियों को सूचना दी जाती है कि राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाये जाने का विधेयक पास हो गया है। बाघों को मारने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसलिए जो भी बाघों पर अत्याचार करेगा या फिर ‘इंक्वायरी टीम’ जिसके खिलाफ भी सबूत पेश करेगी, उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। बाघ हमारा [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 29, 2011 पर प्रकाशित
’‘बड़ी पॉलिटिक्स है नैनीताल में। ये शहर अब रहने लायक नहीं रहा। मैं आज ही ये शहर छोड़कर जा रहा हूँ।’’ दयाशंकर झल्लाया हुआ कमरे में आया और अपना सामान बाँधने लगा। दयाशंकर मेरा दोस्त है। पढ़ा-लिखा बेरोजगार है, भगवान की दया से अब ‘ओवर ऐज’ भी हो गया है। थोड़ा चिड़चिड़ा है पर दिल [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 28, 2011 पर प्रकाशित
बापू आप महान हैं। आप की महानता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि आप मेरे पैदा होने से पहले ही देश को आजाद करा गये। मैंने भी अपना कर्तव्य पूरी तरह से निभाया है। आपके जन्म दिवस पर लड्डू खाये हैं, तो शहीद दिवस पर श्रद्धांजली भी दी है। आप भारतवर्ष में जहाँ [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :October 25, 2010 पर प्रकाशित
राजनीति और मौसम के बारे में हमारी याददाश्त बेहद कमजोर होती है। बड़े से बड़ा घोटालेबाज नेता अगली बार फिर चुनाव जीत जाता है। वोट देते समय न जाने क्यों हम उसके पिछले कुकर्म याद नहीं रख पाते। हमारी याददाश्त का यही हाल तब होता है जब मौसम बदलता है। हर बार गर्मियों में हम [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
होली आ गयी। हर साल आती है। इस बार जरा जल्दी आयी। मैं स्वभाव से घरघुस्सू किसम का हूँ। कोई भी त्यौहार, खास कर होली उत्सवप्रिय आदमी के लिए है। हर त्यौहार में पता नहीं मेरा मन क्यों बुझ सा जाता है। होली में तो सशंकित भी रहता हूँ। भला क्यों, नहीं समझ पाता। भाभी [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
मरने के बाद लोग मरने वाले की इतनी और ऐसी-ऐसी तारीफें करते हैं कि सुन कर कई बार मर जाने का बड़ा मन करता है कि हाय, लोग मेरे बारे में कितने ऊँचे और अच्छे विचार रखते हैं। मैं उन्हें यूँ ही कमीना समझता रहा। हम यूँ ही बेखुदी में जिये चले जाते हैं। हमें [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
अभी उस दिन एक परिचित अध्यापिका मुझसे अपना दुख बाँट रही थीं कि ‘‘आज हमारे स्कूल में एक लड़की के पास प्रेम पत्र पाया गया, जिसके लिए उसे खुली असेम्बली में डांट पिलाई गई।’’ मुझे बड़ा बुरा लगा ….. प्रेम पत्र इतनी अस्वाभाविक और अप्राकृतिक चीज तो नहीं कि जिसके लिए इतनी जिल्लत उठानी पड़े [...]
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