राष्ट्रीय शोक: राजनीति ने गड़बड़ाया देश का मोराल
टीवी में तोंदधारी महाराष्ट्र पुलिस जो थ्री नॉट थ्री लिये हैं देख कर एक दर्शक कह रहे हैं – ‘‘आतंकवादी इन्हें देख रहे होंगे तो हँस रहे होंगे – इस जमाने में थ्री नॉट थ्री और ये फिटनेस…..।’’ एक दूसरे श्रोता बोले, ‘‘टी.वी. वालों को चार दिन की टी.आर.पी. मिल गई…..।’’ ठांय गोली चलती है….संवाददाता [...]
माफ करना हे पिता ! – 3
(शम्भू राणा के इस आत्मकथ्य को लेकर हमें बहुत सारे पाठकों की मौखिक व टेलीफोन पर प्रतिक्रियायें मिली हैं। हमारा उन सभी पाठकों से निवेदन है कि अपनी प्रतिक्रियायें लिखित रूप में दें। कम से कम एक पोस्टकार्ड लिखने की जहमत अवश्य उठायें।-सम्पादक) एक रोज सीढ़ियों से लुढ़क कर मैं अपना माथा फुड़वा बैठा। लोगों [...]
माफ करना हे पिता! – 2
देहरादून की यह यादें सन 1971 के आस-पास और उसके कुछ बाद की हैं। समय का अंदाज एक धुँधली सी याद के सहारे लगा पाता हूँ। शाम को रोशनदानों में बोरे ठूँस दिये जाते थे और कमरे के अंदर जलती हुई ढिबरी को गुनाह की तरह छिपाया जाता। बाहर घटाटोप अंधेरा। यकीनन उस समय सन [...]
माफ करना हे पिता!
सभी के होते हैं, मेरे भी एक (ही) पिता थे। शिक्षक दिवस सन् 2001 तक मौजूद रहे। उन्होंने 70-72 वर्ष की उम्र तक पिता का रोल किसी घटिया अभिनेता की तरह निभाया मगर पूरे आत्म विश्वास के साथ। लेकिन मैं उन्हें एकदम ही ‘पीता’ नहीं कहने जा रहा। इसलिये नहीं कि मेरे बाप लगते थे [...]
होली-2008 : मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी,
मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी, हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी। हाई रे! अलिबेर यो देखौ मजेदारी।। धो-धो कै तो सीट जरनल भै छौ, धो-धो कै ठाड़ हूँणै ऐ बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। फिर बीस बरसै की छुट्टी भै कूँनी, फिरी काँ आली हमरी बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। [...]
सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 3
उस दिन का सफर घंटों तक धूल और गड्ढों भरी सड़क में किया। धूल की वजह से शीशे चढ़े ही रहे, गाड़ियों की रफ्तार बैलगाड़ी जितनी हो कर रह गयी। मुश्किल से कई घंटों बाद पक्की सड़क के दर्शन हुए। गाड़ी ने ज्यादा तंग नहीं किया, ठीक-ठाक चलती रही। दिन के एक-डेढ़ बजे किसी जगह [...]
सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 2
पिछ्ले अंक से आगे मेडिकल कॉलेज के अंदर गाड़ी ले जाने की इजाजत ब आसानी मिल गयी। बाबूजी ऑफिस में जाकर पूछ आए कि इस नाम का जवान इधर किधर मिलेगा। हमारा दामाद है। बताया गया फलां ब्लॉक में। एक-डेढ़ घंटे पूरे परिसर में गाड़ी घूमती रही पर बाबूजी के बेटी-दामाद मिलकर नहीं दिये। रज्जन [...]
सफरानामा पूना से मारूति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 1
यह ठीक दो साल पहले की बात है। दिन- वार ठीक से याद नहीं। अक्टूबर का महीना था। उन दिनों रामलीला (ऐं) चल रही थी। अल्मोड़ा से तीन जने दिल्ली के लिये रवाना हुए – बागेश्वर से केशव, अल्मोड़ा से रज्जन बाबू और मैं। हमें पूना से एक मारूती 800 कार बागेश्वर पहुंचानी थी। केशव [...]
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