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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
राजा भगीरथ की तपस्या से अवतरित भागीरथी अपनी पहाड़ी घाटी से विलीन हो रही है। अपने उद्गम स्थान गंगोत्री से किंचित दूरी तक बह कर वह अब आगे हरिद्वार तक अदृश्य हो रही है। कारण है उस पर बन रही 16 छोटी-बड़ी जलविद्युत परियोजनायें। इनके लिए उसे धरती के अंदर सुरंगों में डाला जा रहा [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 21, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : ओम प्रकाश भट्ट देश भर के गांधीवादी व पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नदियों के प्रवाह को उनके प्राकृतिक परिवेश में बनाये रखने का संकल्प लिया। नदियों की पवित्रता तथा पावनता को बनाये रखने व नदियों से पलने वाले लोगों के जीवन को बचाने के लिए पूरे देष में संघर्ष की रणनीति बनायी। यह तय [...]
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लेखक : राधा बहन :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
मैं ऋषिकेश से व्याँसी, देवप्रयाग व श्रीनगर होते हुए बद्रीनाथ राजमार्ग से हेलंग तक व वहाँ से उर्गम घाटी के लिये जा रही थी। बसों, टैक्सियों, रेस्तराओं, पर्यटक केन्द्रों और शोरूमों पर हर जगह एक ही शब्द लिखा मिलता था ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’। बार-बार कर उभर-उभर कर आने वाला यह वाक्य मानो जबरन सिद्ध करने का [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 13, 2008 पर प्रकाशित
सेवाग्राम में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय नदी सम्मेलन के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सुप्रसिद्ध विद्वान मुकुन्द घारे ने कहा कि हालाँकि बापू की पुण्यस्थली यह कहने के लिये उचित जगह नहीं है, लेकिन यह सच है कि आज यदि मेरी आयु पच्चीस वर्ष की होती तो मैं नक्सलवादी होता। देश की [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2008:: वर्ष :: 31 :February 14, 2008 पर प्रकाशित
रामनगर नदी बचाओ सम्मेलन उत्तराखंड आन्दोलन जन-आकांक्षाओं के विपरीत जा रहे विकास-आयोजन एवं नीतियों के प्रति लगभग पाँच दशकों के अनवरत मोहभंग का परिणाम था। वह विरोध में उठा आम आदमी का सिंहनाद था- नकार का सिंहनाद। नकार के उस सिंहनाद ने उत्तराखंड राज्य के मामले में सामाजिक, आर्थिक, पारिस्थितिकीय, सांस्कृतिक, राजनैतिक आदि-आदि तमाम आयामों [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
नदियों पर संकट है सारे गाँव इकट्ठा हों नदियों पर संकट है,सारे गाँव इकट्ठा हों, अब सदियों पर संकट है,सारे गाँव इकट्ठा हों। पानी डूबा फाइल में, गाड़ी में मोबाइल में, सारे वादे डूब गये, खून सने मिसाइल में। एक गाँव पर संकट है, सारे गाँव इकट्ठा हों। एक गाँव पर संकट है, सारे गाँव [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 30, 2008 पर प्रकाशित
उत्तराखंड की नदी-घाटियाँ 2008 की शुरूआत के साथ ही जन जागरण और जन आन्दोलनों के गीतों से गूँजने लगी हैं। नदी किनारे की बसासतों से होकर, जल, जंगल और जमीन पर आसन्न संकट के खिलाफ लोगों को सक्रिय होने का संदेश दे रही, लगभग 15 पदयात्राओं का सिलसिला जारी है। जन-आन्दोलनों के गीत, पदयात्रायें तथा [...]
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लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
जोड़ – आम-बुबु सुणूँ छी गदगदानी ऊँ छी रामनङर पुजूँ छी कौशिकै की कूँ छी पिनाथ बै ऊँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। कौशिकै की कूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। क्या रोपै लगूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। क्या स्यारा छजूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। घट-कुला रिङू छी मेरि [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : भास्कर पानी पर जनता का अधिकार सुनिश्चित करने के लिये स्वयंसेवी संगठनों की पहल पर उत्तराखंड की नदियों के किनारे जल यात्रायें निकाली जा रही हैं। तय कार्यक्रमानुसार लगभग पंद्रह नदियों के किनारे 1 जनवरी से शुरू हो रही यात्राओं का संगम 15 जनवरी को रामनगर में होगा। वहाँ 16 व 17 जनवरी [...]
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