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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :March 2, 2011 पर प्रकाशित
राजेन्द्र तिवारी बाँध परियोजनाओं के माध्यम से उत्तराखंड में ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति चल रही है। शुरूआती दौर से स्थानीय जनता बाँधों का विरोध करती आयी है तो कम्पनियाँ धनबल और प्रशासन की मदद से अवाम के एक वर्ग को बाँधों के पक्ष में खड़ी करती रही है। ‘नदी बचाओ आन्दोलन’ की [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : बसंत पांडे ‘नदी बचाओ अभियान’ के दो वर्ष पूरे होने पर एक समीक्षात्मक बैठक 22 दिसम्बर 09 को कौसानी के लक्ष्मी आश्रम में सम्पन्न हुई। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार चिपको आन्दोलन ने पेड़ों के प्रति चेतना पैदा की, उसी प्रकार नदी बचाओ अभियान ने पानी व नदी के प्रति जागृति पैदा [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :February 15, 2009 पर प्रकाशित
विगत डेढ़ वर्ष से उत्तराखंड में नदियों को बचाये जाने की जन जागरूकता के लिये एक अच्छा कार्यक्रम लगभग स्वैच्छिक स्तर पर ‘नदी बचाओ अभियान’ के नाम से संचालित हो रहा है। इस अभियान के दूरगामी परिणाम कितने सफल होंगे यह कहना तो फिलहाल नामुमकिन है, परंतु जहाँ एक ओर पहाड़ के जागरूक व्यक्ति व [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
नदी सूखते जा रहे झरने और उजड़ते जा रहे पहाड़ उजाड़ पहाड़ों को देखती रात-दिन विलाप में लीन है नदी तिसपर चाहे जो, चाहे जहाँ, रोक लेता उसे तो ठीक से चल फिर भी नहीं पाती नदी कई दिनों में भूखी प्यासी मरणासन्न है नदी, इसलिए न तो अपने जलचरों से बातें कर पाती, ना [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
इस अंक के साथ नैनीताल समाचार अपने 31 वर्ष पूरे कर 32वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह जनमबार अंक हम ‘नदी अंक’ के रूप में निकाल रहे हैं। हालाँकि यह अंक उस रूप में नहीं निकल पा रहा है, जैसा हम चाहते थे या जैसे हमारे अब तक के जनमबार अंक निकलते रहे [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
नदी का सम्बन्ध पानी से है और रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून…….से लेकर तीसरे विश्व युद्ध के पानी के लिए लड़े जाने की आशंकाओं तक पानी की अहमियत जगजाहिर है। पानी जीवन आधारक बुनियादी संसाधन है। पानी के भीतर सूक्ष्म जीवन अंकुरित होता है……कालान्तर में पुष्पित पल्लवित होती है एक पूरी खाद्य-श्रंखला। पानी [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008:: वर्ष :: 31 :June 14, 2008 पर प्रकाशित
अन्ततः नदी बचाओ अभियान के दबाव में आकर उत्तराखंड शासन को आन्दोलनकारियों की बात सुननी ही पड़ी। 14 मई की शाम मुख्य सचिव एस.के. दास की अध्यक्षता में उनके ही सभा कक्ष में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें नदी बचाओ अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों के अतिरिक्त उत्तराखंड जल विद्युत निगम लि. के अध्यक्ष व प्रबंध [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 13, 2008 पर प्रकाशित
सेवाग्राम में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय नदी सम्मेलन के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सुप्रसिद्ध विद्वान मुकुन्द घारे ने कहा कि हालाँकि बापू की पुण्यस्थली यह कहने के लिये उचित जगह नहीं है, लेकिन यह सच है कि आज यदि मेरी आयु पच्चीस वर्ष की होती तो मैं नक्सलवादी होता। देश की [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2008:: वर्ष :: 31 :February 14, 2008 पर प्रकाशित
रामनगर नदी बचाओ सम्मेलन उत्तराखंड आन्दोलन जन-आकांक्षाओं के विपरीत जा रहे विकास-आयोजन एवं नीतियों के प्रति लगभग पाँच दशकों के अनवरत मोहभंग का परिणाम था। वह विरोध में उठा आम आदमी का सिंहनाद था- नकार का सिंहनाद। नकार के उस सिंहनाद ने उत्तराखंड राज्य के मामले में सामाजिक, आर्थिक, पारिस्थितिकीय, सांस्कृतिक, राजनैतिक आदि-आदि तमाम आयामों [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
नदियों पर संकट है सारे गाँव इकट्ठा हों नदियों पर संकट है,सारे गाँव इकट्ठा हों, अब सदियों पर संकट है,सारे गाँव इकट्ठा हों। पानी डूबा फाइल में, गाड़ी में मोबाइल में, सारे वादे डूब गये, खून सने मिसाइल में। एक गाँव पर संकट है, सारे गाँव इकट्ठा हों। एक गाँव पर संकट है, सारे गाँव [...]
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