नदियों के किनारे चल पड़ी हैं पदयात्रियों की टोलियाँ
उत्तराखंड की नदी-घाटियाँ 2008 की शुरूआत के साथ ही जन जागरण और जन आन्दोलनों के गीतों से गूँजने लगी हैं। नदी किनारे की बसासतों से होकर, जल, जंगल और जमीन पर आसन्न संकट के खिलाफ लोगों को सक्रिय होने का संदेश दे रही, लगभग 15 पदयात्राओं का सिलसिला जारी है। जन-आन्दोलनों के गीत, पदयात्रायें तथा [...]
मेरि कोसि हरै गे कोसि
जोड़ – आम-बुबु सुणूँ छी गदगदानी ऊँ छी रामनङर पुजूँ छी कौशिकै की कूँ छी पिनाथ बै ऊँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। कौशिकै की कूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। क्या रोपै लगूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। क्या स्यारा छजूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। घट-कुला रिङू छी मेरि [...]
पानी पर जनता के अधिकार सुनिश्चित करने निकलेंगी नदी यात्राएं
प्रस्तुति : भास्कर पानी पर जनता का अधिकार सुनिश्चित करने के लिये स्वयंसेवी संगठनों की पहल पर उत्तराखंड की नदियों के किनारे जल यात्रायें निकाली जा रही हैं। तय कार्यक्रमानुसार लगभग पंद्रह नदियों के किनारे 1 जनवरी से शुरू हो रही यात्राओं का संगम 15 जनवरी को रामनगर में होगा। वहाँ 16 व 17 जनवरी [...]
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