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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 26, 2011 पर प्रकाशित
अल्मोड़ा शहर में दो-तीन सार्वजनिक जगहों पर ब्लैक-बोर्ड बने हैं। एक है बस स्टेशन पर, कचहरी को जाने वाली सीढ़ियों के नीचे। दूसरा लाला बाजार में किशन गुरुरानी की दुकान के आगे। तीसरा बावन सीढ़ी वाले चौराहे में सार्वजनिक मूत्रालय की दीवार पर। इस तीसरे ब्लैक-बोर्ड की एक कहानी है। जिसे थोड़ा रुक कर कहूँगा। [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
होली अंक में शम्भू जी की तरंग कुछ ज्यादा ही वल्गर हो गयी। ऐसा लगा पढ़कर कि वे उत्तराखंड के सोद्देश्य पाक्षिक में न लिखकर अपने चौकड़ी के चार यारों को अपने दिनों का किस्सा सुना रहे हों। चलो, फिर लिखने वाले ने लिख दिया। मगर समाचार का एक सम्पादक भी तो है। उसकी भूमिका [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
होली आ गयी। हर साल आती है। इस बार जरा जल्दी आयी। मैं स्वभाव से घरघुस्सू किसम का हूँ। कोई भी त्यौहार, खास कर होली उत्सवप्रिय आदमी के लिए है। हर त्यौहार में पता नहीं मेरा मन क्यों बुझ सा जाता है। होली में तो सशंकित भी रहता हूँ। भला क्यों, नहीं समझ पाता। भाभी [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
मरने के बाद लोग मरने वाले की इतनी और ऐसी-ऐसी तारीफें करते हैं कि सुन कर कई बार मर जाने का बड़ा मन करता है कि हाय, लोग मेरे बारे में कितने ऊँचे और अच्छे विचार रखते हैं। मैं उन्हें यूँ ही कमीना समझता रहा। हम यूँ ही बेखुदी में जिये चले जाते हैं। हमें [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2008:: वर्ष :: 31 :August 1, 2008 पर प्रकाशित
(शम्भू राणा के इस आत्मकथ्य को लेकर हमें बहुत सारे पाठकों की मौखिक व टेलीफोन पर प्रतिक्रियायें मिली हैं। हमारा उन सभी पाठकों से निवेदन है कि अपनी प्रतिक्रियायें लिखित रूप में दें। कम से कम एक पोस्टकार्ड लिखने की जहमत अवश्य उठायें।-सम्पादक) एक रोज सीढ़ियों से लुढ़क कर मैं अपना माथा फुड़वा बैठा। लोगों [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2008:: वर्ष :: 31 :July 15, 2008 पर प्रकाशित
देहरादून की यह यादें सन 1971 के आस-पास और उसके कुछ बाद की हैं। समय का अंदाज एक धुँधली सी याद के सहारे लगा पाता हूँ। शाम को रोशनदानों में बोरे ठूँस दिये जाते थे और कमरे के अंदर जलती हुई ढिबरी को गुनाह की तरह छिपाया जाता। बाहर घटाटोप अंधेरा। यकीनन उस समय सन [...]
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लेखक : शंम्भू राणा :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2008:: वर्ष :: 31 :July 1, 2008 पर प्रकाशित
सभी के होते हैं, मेरे भी एक (ही) पिता थे। शिक्षक दिवस सन् 2001 तक मौजूद रहे। उन्होंने 70-72 वर्ष की उम्र तक पिता का रोल किसी घटिया अभिनेता की तरह निभाया मगर पूरे आत्म विश्वास के साथ। लेकिन मैं उन्हें एकदम ही ‘पीता’ नहीं कहने जा रहा। इसलिये नहीं कि मेरे बाप लगते थे [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 29 फरवरी 2008:: वर्ष :: 31 :February 28, 2008 पर प्रकाशित
समस्त नैनीताल समाचार परिवार को नव वर्ष व मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें। कुछ समय पहले आपके ही माध्यम से नैनीताल समाचार का वजूद उत्तराखंड की सूचना निर्देशिका से नकारने का समाचार मिला तो कोई बहुत हैरानी नहीं हुई। आज के इस कमीशनखोर, चाटुकारिता वालों और सर्वत्र भ्रष्टाचार मय दीमकों के युग में एक ईमानदार [...]
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