घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . समापन किस्त
स्मृतियों की बारात इतनी लम्बी होती है कि उसका सब कुछ याद रख पाना सम्भव नहीं होता। उस बारात में खो जाना भी स्वाभाविक है। संस्मरण में वर्ण्य वस्तु-व्यक्ति के अतिरिक्त लेखक स्वयं भी अंकित होता चलता है और वह तटस्थ नहीं रह पाता है। लेखक जो स्वयं देखता है, अनुभव करता है उसी का [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 20
1 नवम्बर 1984 को हल्द्वानी में जो कुछ घटा, वह निश्चित रूप से जघन्य और निन्दनीय था। लेकिन इसके पीछे कई सालों का दबा हुआ गुस्सा भी था, जो इन्दिरा गांधी की हत्या के बहाने फूटा। आजादी के बाद के दशकों में अनेकों ऐसी घटनायें हुईं, जिससे पहाडि़यों के मन में सिखों को लेकर नाराजगी [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 18
मूल रूप से जिला बुलन्दशहर के जहाँगीराबाद के रहने वाले, ज्योतिष विद्या के जानकार पंडित गणेश दत्त शर्मा करीब 125 साल पूर्व अल्मोड़ा आकर लाला बाजार में हलवाई का कार्य करने लगे। 2-3 साल बाद वे हल्द्वानी आ गये। गणेश दत्त शर्मा के पोते ओमदत्त, जो अब मुख्य गुरुद्वारे के पीछे की लाईन में घड़ीसाज [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 18
मूल रूप से जिला बुलन्दशहर के जहाँगीराबाद के रहने वाले, ज्योतिष विद्या के जानकार पंडित गणेश दत्त शर्मा करीब 125 साल पूर्व अल्मोड़ा आकर लाला बाजार में हलवाई का कार्य करने लगे। 2-3 साल बाद वे हल्द्वानी आ गये। गणेश दत्त शर्मा के पोते ओमदत्त, जो अब मुख्य गुरुद्वारे के पीछे की लाईन में घड़ीसाज [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 17
बरेली रोड पर अब्दुला बिल्डिंग आज भी एक लैंडमार्क है। अब्दुल माजिद के अनुसार अल्लाबख्श साहब के बगीचे में हुनरमन्दों के हाथों इसका निर्माण 1902 में शुरू हुआ था। उस समय यहाँ जंगली जानवर टहलते रहते थे। 1920 से अब्दुल्ला बिल्डिंग का व्यावसायिक इस्तेमाल होने लगा। अब्दुल्ला साहब के मंगल पड़ाव वाली बिल्डिंग के सामने [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 16
15 अगस्त 1978 का दिन। एक ग्राहक मेरे सामने खड़ा था, ‘‘मुझे अखबार छपवाना है।’’ एक छोटा छापाखाना कैसे नियमित रूप से किसी दूसरे का अखबार छाप सकता है ? यही बात मैंने उसे समझानी चाही। अलबत्ता सीमान्त मुनस्यारी के दुर्गासिंह मर्तोलिया को मैं पहचान गया था। वह एक जमाने में नैनीताल के डी.एस. बी. [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 15
प्रारम्भ में नारायण दत्त तिवारी सामाजिक अध्ययन के लिए योरोप रह चुके हरिकृपाल शर्मा को पीपुल्स कालेज का प्रधानाचार्य बना कर लाए। उनकी देखरेख में यूथ लीडर एसोसिएशन का गठन हुआ और सुधीर विनायक के सम्पादन में ‘यूथ टाइम्स’ नामक एक समाचार पत्र निकला। सुधीर विनायक ने बाद में आत्महत्या कर ली। युवाओं में जागरूकता [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 14
यह सच है कि औद्योगिक विकास से इस क्षेत्र की बेरोजगारी हल हो सकती है, लोगों का जीवन स्तर सुधरा जा सकता है, लेकिन अब तक यहाँ स्थापित हुए उद्योगों के हश्र से जाहिर होता है कि भारी उद्योगों के लिए भाबर अनुपयुक्त है। सबसे बड़ा उद्योग सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल, लालकुआ जन्मकाल से [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 13
शीशम बाग के जंगल के बाद सरकारी फार्म, हिमालय फार्म, दुली प्रधान व लाखनसिंह के खेत और उससे आगे पक्के मकान हुआ करते थे। रामपुर रोड जंगलात की एक कच्ची सड़क थी। जिसे आजकल समता आश्रम गली कहा जाता है, उससे उत्तर की ओर खेत थे और बीच-बीच में पेड़ व झाडि़याँ। सन् 1950 के [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 12
एक समय था जब भाबर में बसने के लिये मुफ्त में जमीन मिलती थी, सरकारी सहयोग मिलता था। जमीन में चहारदीवारी करवा दी जाती थी। मकानों की पहरेदारी के लिए मेहनताना मिलता था। भाबर में बसने-बसाने की प्रक्रिया में बहुत से मेहनती व साहसी लोग यहाँ बसे। चारों ओर लहलहाते आम-अमरूद के बगीचे थे। बाद [...]
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