सड़क न होने से बूढ़ाकेदार से कट रहे हैं तीर्थ यात्री
उत्तराखण्ड में बूढ़ाकेदार का एक ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ पर बूढ़ा केदार बाबा का पौराणिक मंदिर है, जिसके दर्शन करने आज भी सैकड़ों पैदल तीर्थ यात्री हर साल आते हैं। जब तक उत्तराखण्ड में सड़कों का विकास नहीं हुआ था, तीर्थयात्रियों के लिये बूढ़ाकेदार का एक महत्वपूर्ण स्थान रहता था। सड़कों के विकास के साथ [...]
जनता की सहभागिता से चले पर्यटन
पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। चारों धामों में धार्मिक पर्यटन कई सालों से चल रहा है। नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, देहरादून सहित अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो स्वतः ही लोगों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में साहसिक पर्यटन और इको टूरिज्म की अवधारणा ने पर्यटन की संभावनाओं में नए आयाम जोड़े हैं। [...]
पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर सकी जलक्रीड़ा प्रतियोगिता
प्रस्तुति : मनीश उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद, कुमाऊँ मंडल विकास निगम लि., इंडियन कयाकिंग व कनोइंग एसोसिएशन तथा उत्तराखण्ड कयाकिंग, कनौइंग एण्ड राफ्टिंग एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 26 अप्रेल तक प्रथम आल इंडिया ओपन आमंत्रण कयाकिंग एवं कनोइंग प्रतियोगिता का आयोजन भीमताल में किया गया। प्रतियोगिता में असम, मिजोरम, बी.ई.जी. रुड़की, तमिलनाडु, [...]
मग्रास सिर्फ एक सपने का नाम नहीं है
प्रस्तुति : तारु भंडारी सैलानियों के लिये उत्तराखंड एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ कुछ दिन या सप्ताह अच्छी तरह बिताये जा सकते हैं। लेकिन लम्बे समय तक रहने के लिये यह स्थान ज्यादा सुविधाजनक नहीं- रेलवे स्टेशन से दूरी, जाड़ों में अधिक ठंडक, बाजार का अभाव तथा चिकित्सा सुविधाओं की कमी। पर यहाँ अनेक स्थान [...]
मक्कू मठ: इतिहास से विकास तक का सफर
घने देवदार, बाँज, बुरांश, थुनेर के वृक्षों के बीच अत्यंत शोभनीय मक्कू मठ का इतिहास प्रथम शताब्दी पूर्व माना जाता है। मार्कण्डेय ऋषि की तपस्थली कहा जाने वाला यह क्षेत्र देवासुर संग्राम और आर्य व अनार्य जातियों की संघर्ष गाथायें अपने में समेटे हुए है। प्राचीन आदिवासी मौर जातियाँ ग्रीष्म काल में अपने पशुओं के [...]
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