कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल !
लो सपने संजोये जिसका इंतजार था, वो सीजन आ ही गया। सीजन कभी अकेला नहीं आता, अपने साथ कई फजीहतें भी साथ लाता है। मंत्री, संत्री, भिखारी, मदारी, सीजनल पुलिस और गिरहकटों के साथ-साथ ‘एफ टीवी’ से निकले लोग भी चले आते हैं। नैनीताल वाले हमेशा दुआ माँगते हैं कि इस बार सीजन में वी.आई.पी. [...]
एंगलिंग यानी मछली मारने का खेल
ताल के किनारे मछली मारने वालों को देखना कई बार गहन अनुभूति देता है। पर नैनीताल जैसे शहर में अब ऐसे दृश्य दिखाई नहीं देते। जबकि मछली पकड़ना अब उच्च वर्ग के पर्यटकों के शौक में शामिल हो चुका है। गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटक उत्तरी भारत के पर्यटन स्थलों और [...]
मानसून में कई रूप दिखते हैं हिमालय के…
मानसून में हिमालय के कई रूप दिखते हैं। जरा सा मौसम खुले तो समूचा पहाड़ पॉलिश किया सा लगता है और वहीं पल भर में मौसम ने करवट बदली और प्रकृति का दूसरा भयावह चेहरा सामने दिखता है। तूफानी बारिश के साथ ही चारों ओर फैला कोहरा अजीब सी सिहरन पैदा कर देता है। पर्वतारोहियों [...]
चारधाम यात्रा की तैयारी शुरू
चार धामों, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्तरी और यमुनोत्तरी के खुलने में अभी कुछ सप्ताह का समय बचा हुआ है। मगर बदरी-केदार मंदिर समिति ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस वर्ष के यात्रा काल के लिए समिति द्वारा 26 करोड़ 53 लाख 94 हजार का बजट रखा है। गत दिनों मंदिर समिति की ऋषिकेश में [...]
देहरादून का कलिंगा स्मारक
के. पी. काला ’मानस’ एवं पुष्पा मानस आपने देहरादून की सहस्त्रधारा रोड पर स्थित कलिंगा स्मारक जरूर देखा होगा। ये वो ’कलिंगा’ यानी उड़ीसा नहीं, जिसे सम्राट अशोक ने लगभग 260 या 265 वर्ष ईसा पूर्व जीता था। इस स्मारक का सम्बन्ध गोरखा सेनानायक बलभद्र सिंह खलिंगा थापा से है, जिसने सन् 1802-03 से 1815 [...]
थर्टी फर्स्ट के बाद
‘‘कहो कैसा लगा नैनीताल ? कहा था न… ऐसी जगह ले जाउंगा जहाँ सकून है, तन्हाई है, मस्ती है।’’ ‘‘वाह क्या जगह है नैनीताल, मै तो हर साल यहाँ आना चाहूँगी। न आई.डी का झंझट है न ‘रेड’ का डर। हाँ, थोड़ा महंगा जरूर है, पर ‘सेफ’ है।’’ एक जनवरी की सुबह मालरोड कूड़े से [...]
लैंसडाउन पर भू-माफियाओं की नजर
पंकज शर्मा लैंसडाउन किसी परिचय का मोहताज नहीं है। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण यह नगर आज पर्यटकों की आवाजाही का केन्द्र बनता जा रहा है। उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2003 में इसे पर्यटन सर्किट के तहत विकसित करने की भारी भरकम घोषणा की थी जो अब तक वास्तविक धरातल पर नाममात्र के लिये [...]
मुम्बई का हिल स्टेशन ‘माथेरान’ और नैनीताल
‘माथेरान’ यानी चोटी पर जंगल/शिखर पर वन (वुडेड हैड) मुम्बई का सबसे नजदीकी हिल स्टेशन है। अपने आप में अलग-अनूठा। छायादार घने पेड़ों से लदी-फंदी, हरी-भरी समतल सी पहाड़ी, जिसके चारों ओर, अंदर-बाहर, नीचे-ऊपर लहरदार पैदल रास्ते हैं-पैदल पथ। लगभग आठ सौ मीटर की ऊँचाई और आठ एक हजार की स्थानीय आबादी वाले माथेरान के [...]
ईको टूरिज्म का मतलब व्यापार नहीं होता
वन विभाग पहाड़ों में एक नए जमींदार के रूप में अवतरित हो गया है। उसने यहाँ वनों में घूमनेवाले पर्यटकों पर एक कर लगा दिया है, जिसे नाम दिया गया है ‘ईको टूरिज्म कर’। देश-विदेश से हिमालय देखने-घूमने साल में लाखों लोग आते हैं, गर्मिंयों में अधिक। यदि ये लोग जंगलों में घूमना चाहते हों, [...]
सड़क न होने से बूढ़ाकेदार से कट रहे हैं तीर्थ यात्री
उत्तराखण्ड में बूढ़ाकेदार का एक ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ पर बूढ़ा केदार बाबा का पौराणिक मंदिर है, जिसके दर्शन करने आज भी सैकड़ों पैदल तीर्थ यात्री हर साल आते हैं। जब तक उत्तराखण्ड में सड़कों का विकास नहीं हुआ था, तीर्थयात्रियों के लिये बूढ़ाकेदार का एक महत्वपूर्ण स्थान रहता था। सड़कों के विकास के साथ [...]
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