घराटों को लेकर खींचतान
घराटों के रख-रखाव एवं पुरातन सभ्यता के संवाहक उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत इन घराटों के संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन कितना संजीदा है, इसका पता इस बात से मिलता है कि पहाड़ों में अधिकांश घराट बंद हो चुके हैं। या जो हैं, वे भी बंद होने के कगार पर खड़े हैं। हाल के कुछ [...]
अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
उत्तराखंड में इस साल अब तक पानी की स्थिति बहुत विकट रही है। जाड़ों में बहुत कम हिमपात होने के कारण सन् 2009 की गर्मियों में बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की बहुत कमी रही। हिमनद से बनने वाली भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में गर्मियों में पानी का औसत प्रवाह लगभग 50 प्रतिशत [...]
पेयजल योजनाओं में परम्पराओं का ध्यान रखना जरूरी है
हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि जहाँ लोग परम्परागत ढंग से प्रयोग कर रहे हैं, वहाँ पानी की उपलब्धता बनी है। अन्यथा आये दिन पानी का संकट गहराता जा रहा है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बर्नीगाड़ स्थित गंगनाणी धारा का उदाहरण लें। एक प्रचलित दंतकथा के अनुसार जब [...]
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