नैनीताल समाचार के वे अभिभावक थे
21 नवम्बर को ई.टी.वी. पर रात की खबरों को देखते हुए नीचे की पट्टी पर चन्द्रसिंह यायावर के निधन का समाचार पढ़ा तो विश्वास नहीं हुआ। मेरे लिये मेहलचौरी की सबसे बड़ी पहचान यही थी कि यहाँ चन्द्रसिंह यायावर रहते थे। उनके लेख पत्र-पत्रिकाओं के साथ ही प्रमुखता से ‘नैनीताल समाचार’, ‘युगवाणी’ और रीजनल रिर्पोटर [...]
भूल सुधार: क्या पहाड़ के सिपाही के जीवन का मूल्य कम होता है ?
संपादकजी, मैंने जोशीमठ के फौजी ब्रिगेड की जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें की एक गलती का सुधार करना चाहता हूँ। उसमें लिखा था कि दो गढ़वाली सैनिक शहीदों की माता तथा पत्नी को सम्मानित किया गया। उसमें दोनों को भूल से मैंने करगिल शहीद लिख दिया। जब कि सुरजनसिंह भंडारी अक्षरधाम पर 24 सितंबर 2002 [...]
हिन्दी पत्रकारिता के शलाका पुरुष को नमन !
प्रस्तुति : मंगलेश डबराल कबीर के एक दोहे ‘आये थे हरि भजन को/ओटन लगे कपास’ को अक्सर दोहराने वाले प्रभाष जोशी समाज के बदलने और अगर यह संभव न हो तो एक कवि और लेखक के रूप में कुछ करने का इरादा लेकर निकले थे लेकिन अंततः पत्रकारिता की कपास धुनने लगे। उन्होंने विनोबा भावे [...]
ये कैसी श्रद्धांजलि!
हम पर किये गये जुल्मों का प्रतीक है प्रताप मारा गया पुलिस की गोली से 3 अक्टूबर उन्नीस सौ चौरानब्बे हर साल 2 मिनट का मौन रख कर अपनी श्रद्धांजलि प्रकट करते आ रहे हैं हम तब से। जो भी श्रद्धांजली देते हैं हम आज दुश्मन के खिलाफ अपने भीतर के गुस्से में हम जोड़ [...]
मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी
सिर्फ एक महीने के भीतर पहले धर्मानंद उनियाल गये, फिर पीताम्बर डेवरानी ने साथ छोड़ा और अपने को सम्हाल पाते, इससे पहले ही हुकुम सिंह पँवार ने हमसे विदा ले ली। अचानक इन तीनों का जाना साहित्य, समाज और राजनीति के क्षेत्र में शून्यता पैदा कर गया। हुकुम सिंह पँवार का जन्म टिहरी जनपद के [...]
अलविदा गौतम दा !
अभी कुछ दिन पहले ही तो उससे मोबाइल पर बात हुई थी। दिल्ली से लौट रहा था, घर पहुँचने से पहले न जाने मन में ख्याल आया कि चलो आज फिर बात कर लूँ। मगर अफसोस कि ऐसा सिर्फ सोचा ही, बात नहीं कर पाया और फिर दो-एक दिन बाद 10 अगस्त को वह भयानक [...]
रियासत मुक्ति आन्दोलन से राज्य आन्दोलन तक का सफर
12 अगस्त की शाम धर्मानन्द उनियाल ‘पथिक’ हमें छोड़ कर चले गये….. …..जब कभी मैं अपने उन भूले-बिसरे दिनों के बारे में सोचता हूँ तो मेरे सम्मुख कई चेहरे फिल्म की रील की तरह तैर जाते हैं। स्वामी मनमथन, सरदार प्रेम सिंह, अवतार सिंह पँवार, सत्य प्रकाश रतूड़ी के साथ ही धर्मानन्द उनियाल ‘पथिक’ का [...]
ए गमे दिल क्या करूँ
स्मृतिशेष ‘‘ए गमे दिल क्या करूँ, वहशते दिल क्या करूँ’’ जो इस गीत को फिल्मी गाने के रूप में जानते हैं उनके लिए देवरानी जी की याद में इन पक्तियों का इस्तेमाल शायद ओछा लगे। पर मज़ाज़ की इन पंक्तियों को जिन्होंने पीताम्बर देवरानी जी के मुँह से सुना होगा, वे शायद जानते होंगे कि [...]
‘विरासत’ के बहाने हबीब तनवीर को श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली, कुटुम्ब विकास समिति, नैनीताल एवं शारदा संघ, नैनीताल की प्रस्तुति नाटक ‘विरासत’ सही अर्थों में पिछले दिनों दिवंगत हुए महान रंगकर्मी हबीब तनवीर को सच्ची श्रद्धांजलि थी। 19 जुलाय 2009 को हबीब तनवीर के इस नाटक का मंचन नैनीताल के शैलेहॉल में किया गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय विगत कई वर्षों [...]
नारायण राम दास: कठिन संघर्ष के 63 साल
रविवार 26 जुलाई की सुबह बागेश्वर से दीपक पाठक का फोन आया, ‘‘दाज्यू दास जी भी चल दिये।’’ ऐसा अंदेशा पहले से था, अन्यथा सहसा यकीन नहीं होता। दास जी अर्थात पर्वतीय जन आंदोलनों का एक सुपरिचित नाम- नारायण राम दास। पिछले कुछ समय से वे लीवर व किडनी के संक्रमण से ग्रसित थे। दिल्ली [...]
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