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लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 29, 2011 पर प्रकाशित
आधुनिकता में भटकी ‘उतरैणी’ {15 जनवरी 1978 के अंक में ‘गीराबल्लभ’ नाम से छपा यह लेख गिरदा द्वारा लिखा नैनीताल समाचार में प्रकाशित पहला गद्य है। इसमें उस साल के उतरैणी मेले में वन आन्दोलनकारियों के पहुँचने का भी जिक्र है। -सम्पादक} काले कव्वा काले, खजूरै माल खाले, ले कव्वा बड़े, मैं कै दिये सुनूं [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 19, 2011 पर प्रकाशित
ऐतिहासिक व सामरिक महत्व वाला जौलजीवी मेला 14 नवम्बर से मनाया गया। त्रिदिवसीय मेले में भारत-नेपाल-तिब्बत से व्यापारी आते थे। अब तिब्बत अपनी सहभागिता नहीं निभा पा रहा है जो चिन्तनीय है। ज्वालेख देव की भूमि पर लगने वाले इस मेले का प्रारम्भिक नाम स्थानीय गाँव दुतीबगड़ के नाम से ‘दुती मेला’ के रूप में [...]
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लेखक : घनश्याम जोशी :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 6, 2010 पर प्रकाशित
कोट भ्रामरी मेला इस बार युवाओं के हाथ में था। पाश्चात्य संस्कृति की परछाई दूर-दूर तक नहीं थी। बुजुर्ग भी मेले को लेकर खुश थे। उद्घाटन से लेकर समापन तक कुमाउँनी, गढ़वाली संस्कृति की भरपूर झलक दिखने को मिली। 14 सितंबर को मेले का उद्घाटन विधायक चंदन राम दास ने किया। रात भर कोट भ्रामरी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :August 9, 2010 पर प्रकाशित
विनीत फुलारा/धीरज पाण्डे नैनीताल के निकट भीमताल में हरेला पर्व को सौ साल पहले से भी अधिक समय से मेले के रूप में मनाया जाता है। विगत दशकों में बहुत सारे बदलाव देख चुके यहाँ के बुजुर्गों के अनुसार बाजार के अभाव में आजादी से पहले लोग व्यापार के लिये यहाँ आते थे। व्यापारी घोड़ों [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 22, 2010 पर प्रकाशित
जोशीमठ के निकट हिमालय की वादियों में बसे खूबसूरत गांव सलूड़ डूंग्रा का एक दिन का रम्माण मेला यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर धोषित होने के बाद से आजकल सुर्खियों में है। गांव में मकान दूर-दूर हैं, खूब खेती है और गॉव के शीर्ष से घना जंगल शुरू हो जाता है। शहरों की भीड़-भाड़ और [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 21, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : राजेन्द्र गहतोड़ी काली कुमाऊँ का अतीत स्वर्णिम रहा है। मगर अतीत की विरासत को भविष्य के लिए सहेजने का का पक्ष कमजोर रहा है। संचार के नाम पर बनियों ने नोट छापने की मशीनें तो लगा दीं, लेकिन स्थानीय बेरोजगारों को पत्रकार बनाने के बावजूद स्थानीय संस्कृति को उजागर करने के लिए उनमें [...]
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लेखक : त्रिलोक चन्द्र भट्ट :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
हरिद्वार में सन् 2010 में होने वाले सदी के पहले महापर्व कुंभ मेले की तैयारियों के अन्तर्गत किये जा रहे सभी कार्य अब समापन के अंतिम चरण में हैं। प्रशासन का दावा है कि अक्टूबर 2009 तक सभी कार्य पूर्ण कर लिये जायेंगे। ज्ञातव्य हो कि शासन स्तर पर अभी तक विभिन्न विभागों के 128 [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2008:: वर्ष :: 31 :February 15, 2008 पर प्रकाशित
इस बार बागेश्वर के सरकारी उत्तरायणी मेले के आयोजन को लेकर शुरूआत में प्रशासन असमंजस में फँसा रहा। अन्ततः जैसे- तैसे में ‘मेला समिति’ का गठन हुआ और शासन से दस लाख रुपये आने की भनक पड़ी तो वर्ष भर सोयी रहने वाली नगरपालिका परिषद् भी सक्रिय हो गयी। गली, मुहल्ले, सड़कें, नालियाँ साफ होने [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 16, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : कमलेश कुंवर ग्राम पंचायत चौपता विकास क्षेत्र नारायणबगड़, पट्टी कड़ाकोट के अंतर्गत 154.08 हेक्टेअर क्षेत्र में स्थित है। यहाँ मार्गशीर्ष माह में होने वाले कौथिग का विशेष महत्व है। इस कौथिग में माँ दुर्गा समेत अन्य देवी- देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। मार्गशीर्ष का शुभारंभ होते ही यहाँ गाँव-गाँव में खुशी की [...]
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