क्या इस साल चालू हो जायेगा मेडिकल कॉलेज
प्रदेश का पहला राजकीय मेडीकल कॉलेज बनकर लगभग खड़ा है। प्रतीक्षा इस बात की है कि इसका शैक्षिक सत्र कब तक शुरू होगा। सूबे की भाजपा सरकार की प्राथमिकता इस मेडीकल कॉलेज को जल्दी शुरू करने की है। मेडीकल कॉलेज के लिए आचार्य, उपाचार्य, प्रवक्ता प्राचार्य समेत सभी विभागीय कर्मचारियों की खोजबीन चल रही है। [...]
कब तक मरती रहेंगी नर्मदायें ?
देश के आजादी के 60 दशक बाद भी उत्तराखण्ड के ग्रामीण अंचलों की दशा 18वीं सदी जैसी है। इसका उदाहरण पिछले दिनों जोशीमठ के अंतिम गाँव करछों में मिला। इस गाँव में मेरी सबसे छोटी साली तीन वर्ष पूर्व ब्याही गई थी। गाँव में 100 के लगभग परिवार हैं। यहाँ फरस्वाणों की बड़ी चलती है। [...]
एक बार फिर से एडसिल
उत्तराखण्ड की सरकारें प्रशिक्षण प्रवेश परीक्षाओं की जिम्मेदारी लेने से अभी भी कतरा रही हैं। प्रि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के आयोजन हेतु पूर्व में ब्लैक लिस्टेड एडसिल उ.प्र. को जिम्मेदारी सौंपे जाने से तो यही साबित होता है। एडसिल अर्थात् ‘एजुकेशनल कन्सल्टेंट इंडिया लिमिटेड, नौएडा’ इस राज्य के शिक्षित युवाओं के लिये नया नाम नहीं [...]
अब भुखमरी से भी मौतें!
राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड के आर्थिक विकास में तेजी आई है। राज्य के सम्बन्ध घरेलू उत्पाद में हो रही वृद्धि से इसकी पुष्टि होती है। 1999-2000 में उत्तराखण्ड का सकल घरेलू उत्पाद 12,786.3 करोड़ के लगभग था, जिसके 2009-2010 में 46,899.11 करोड़ तक पहुँच जाने की सम्भावना है। इसी अनुपात में राज्य के प्रति [...]
नेपाल में नया सूर्योदय
पड़ोसी देश नेपाल में एक नया सूर्योदय हो रहा है। संविधान सभा के लिये 10 अप्रेल को हुए चुनाव में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अन्य सभी दलों से बढ़त बना कर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में पहुँच गई है। माओवादियों की इस सफलता की उम्मीद नेपाल अथवा नेपाल के बाहर किसी को नहीं [...]
जबरन माओवाद का भूत पैदा कर रही है उत्तराखंड सरकार
माओवाद के नाम पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न, उनके घरों में आतंकित करने वाले छापे मारने का क्रम जारी है। प्रशान्त राही को रिहा करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने अभी कुछ भी नहीं किया है, जबकि इस प्रकरण में उसे बार-बार कटघरे में खड़ा किया गया है। देहरादून में हुए एक प्रेस सम्मेलन [...]
छेदीलाल बनाम सुराख अली बनाम होलचन्द
लोक में एक बहु प्रचलित कथा है छेदीलाल की। छेदीलाल कोई विशिष्ट व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सामान्य मनुष्य रहा। जब पैदा हुआ, सब ठीकठाक रहा। जब विवाह हुआ तो भी शुरू के दिन ठीक ही रहे। परन्तु जब नई नवेली दुल्हन गाँव की औरतों के बीच गई तो चर्चा में छेदीलाल का नाम आने पर [...]
बौरारो की जनता के सामने लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा
सरकार बदलते ही सोमेश्वर विधान सभा क्षेत्र के बौरारो घाटी की उपेक्षा होने लगी है। जनता को विवश होकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है और 15 जनवरी से आमरण अनशन करने का फैसला किया गया है। राज्य बनने के बाद भी अब तक की सरकारें बिना संघर्ष के जनहित के कार्य नहीं करतीं। [...]
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