ग्रामीण भारत – महाधोखे के जाल में
…अभी नहीं तो, सदियों तक शायद उस का उपचार नहीं !! औरंगजेब और उसके कुछ बाद तक भारत एक औद्योगिक शक्ति के रूप में विख्यात था। उस सोने की चिड़िया को देखने-समझने के लिये राजदूतों का ताँता युगों से लगा रहता था। हमारे यहाँ से धर्म-प्रचारक ही बाहर गये, कोई राजदूत नहीं गये। विश्व की [...]
दीप जोशी को समझने के लिये विकास के क्रम को समझना होगा
प्रस्तुति : इस्लाम हुसैन इस वर्ष मैगसेसे पुरस्कार सीमांत पिथौरागढ़ जनपद के गंगोलीहाट क्षेत्र के गढ़तिर (पुड़याग) गाँव में पैदा हुए दीप जोशी को दिया गया है। डी.एस. बी. कालेज नैनीताल, मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कालेज इलाहाबाद और फिर अमेरिका के एम.आई. टी. से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। अमेरिका से लौट कर उन्होंने देश के [...]
हिवरे बाजार ने रास्ता दिखा दिया है
सत्तर के दशक तक हिवरे बाजार अपने ‘हिन्द केसरी’ पहलवानों के लिये मशहूर था। लेकिन फिर महाराष्ट्र के अहमदनगर का यह गाँव सूखे की चपेट में आ गया। 400 मिमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले इस क्षेत्र में फसलें बर्बाद होने लगीं तो गाँव से पलायन शुरू हो गया। लोग छोटे-मोटे धन्धों के लिये पुणे और [...]
जंगलों के बगैर विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती
ग्रामीण जनता, गाँव एवं गाँवों के बारे में चारों ओर की जमीन, जंगल व जल तथा जानवर ये सब एक दूसरे के पूरक हैं। इनमें एक तरह की पारिवारिक व्यवस्था है, जहाँ दोहन व शोषण के लिये कोई स्थान नहीं है। पिछली एक सदी में जंगलों ने अपना महत्व विशेष रूप से साबित किया है। [...]
‘ग्रामीण विकास का मतलब है ग्रामीण उद्योगों का विकास’
[58 वर्षीय आनन्द बल्लभ जोशी से मेरी मुलाकात ‘माँ सरस्वती उपासना मंदिर प्रणाम’ में 7 जनवरी 2007 को हुई थी। यहीं आपका आवास भी है और कर्मभूमि भी। पत्नी प्रेमा बहन जोशी, दो पुत्र नामेश और नामवेश। व्यवस्थित और संतुलित जीवन। गांधी दर्शन से प्रभावित पति-पत्नी बचपन से ही सामाजिक कार्यों से जुड़ गये। ‘सरस्वती [...]
ठेकेदार अफसर गठबंधन से डरने की जरूरत नहीं
पंचायतों के बारे में मेरी कई ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों व प्रमुखों आदि से चर्चा हुई। यहाँ केवल पौड़ी जिले के यमकेश्वर विकास खंड में ढाँसी, तल्ला ढाँगू के ग्राम प्रधान वीरेन्द्र सिंह रावत व स्योली के ग्राम प्रधान राकेश गौड़ से हुई चर्चा का उल्लेख किया जा रहा है। वीरेन्द्र रावत और राकेश [...]
सहयोग-सौहार्द होना पहली शर्त है
प्रस्तुति : राजेन्द्र सिंह भाकुनी मेरे ग्राम प्रधान बनने की भी एक कहानी है। सुनोली अल्मोड़ा जिले के ताकुला विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम सभा है और बिनसर वन्य जीव विहार से बुरी तरह प्रभावित है। कई तोक गाँव जीव विहार की परिधि के भीतर हैं। मैं 1972 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में सिपाही [...]
संकीर्ण दायरों को टूटना है
प्रस्तुति : ललित जोशी अब तक पंचायती राज में कृषि उत्पादन में वृद्धि, ग्रामीण उद्योगों व सहकारी संस्थाओं का विकास, स्थानीय श्रम शक्ति एवं अन्य संसाधनों का पूर्ण उपयोग, ग्रामीण जनसंख्या की सामाजिक-आर्थिक दशा में सुधार एवं स्व-सहायता की भावना में वृद्धि देखी गयी है। यद्यपि अभी इसमें व्यापक सुधार की गुंजाइश है। परंतु ग्रामीण [...]
मानसिकता बदल रही है
पंचायतों को लेकर लोगों की मानसिकता में बदलाव आ रहा है और सरकार की भी। लोग समझने लगे हैं कि चाहे ग्राम पंचायत हो अथवा नगरपालिकायें, उनको लापरवाही से नहीं लिया जा सकता। शायद वे इन्तजार भी कर रहे हैं कि अभी ये संस्थायें और ज्यादा शक्तिशाली होंगी। यह एक अच्छा लक्षण है। इस साल [...]
……और मैंने एक सपना देखा ….
यह मेरा गाँव है। इसका नाम अब ‘इकचुलिया गाँव’ है। पहले कभी इस गाँव में तीस परिवार बसते थे, अब एक परिवार है। आप सोचते होंगे कि पलायन ने गाँव खाली कर दिया। आप इससे इतर सोच भी क्या सकते हैं ? पर हाँ, यहाँ पलायन जैसा कुछ नहीं हुआ, उलटे बाहर से आकर पाँच-छः [...]
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