खबरदार! ठुलीगाड़ का पानी मत पीना
ठहरिये! कहीं आप ठुलीगाड़ पेयजल योजना का पानी तो नहीं पी रहे हैं। अगर पी रहे हैं तो आप पीलिया से ग्रस्त भी हो सकते हैं। जून से लेकर 6 जुलाई तक जिला अस्पताल में आने वाले रोगियों की आमद अचानक बढ़ गयी है। इन रोगियों में 90 प्रतिशत पीलिया के हैं। जिला चिकित्सालय के [...]
अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
उत्तराखंड में इस साल अब तक पानी की स्थिति बहुत विकट रही है। जाड़ों में बहुत कम हिमपात होने के कारण सन् 2009 की गर्मियों में बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की बहुत कमी रही। हिमनद से बनने वाली भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में गर्मियों में पानी का औसत प्रवाह लगभग 50 प्रतिशत [...]
पेयजल योजनाओं में परम्पराओं का ध्यान रखना जरूरी है
हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि जहाँ लोग परम्परागत ढंग से प्रयोग कर रहे हैं, वहाँ पानी की उपलब्धता बनी है। अन्यथा आये दिन पानी का संकट गहराता जा रहा है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बर्नीगाड़ स्थित गंगनाणी धारा का उदाहरण लें। एक प्रचलित दंतकथा के अनुसार जब [...]
नदियों के किनारे चल पड़ी हैं पदयात्रियों की टोलियाँ
उत्तराखंड की नदी-घाटियाँ 2008 की शुरूआत के साथ ही जन जागरण और जन आन्दोलनों के गीतों से गूँजने लगी हैं। नदी किनारे की बसासतों से होकर, जल, जंगल और जमीन पर आसन्न संकट के खिलाफ लोगों को सक्रिय होने का संदेश दे रही, लगभग 15 पदयात्राओं का सिलसिला जारी है। जन-आन्दोलनों के गीत, पदयात्रायें तथा [...]
इस व्योपारी को प्यास बहुत है
एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम। अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी, तुम तो पानी के व्योपारी, खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी, बिछी हुई [...]
शिमायल में सौन्दर्य है, मगर पानी नहीं
अंधेरा घिर आया था जब हमारी टीम शिमायल पहुँची। हमारे मेजबान हेम चन्द्र कपिल के घर के बच्चे हमें पानी पिलाने लगे। हमने एक बच्चे से एक बाल्टी पानी भर कर रख देने को कहा। लेकिन वह खाली बाल्टी ले आया। तब मालूम पड़ा कि गाँव में पानी की बड़ी समस्या है। नजदीक में कोई [...]
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