लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 24, 2011 पर प्रकाशित
अगर बारिश कम हो तो गर्मियों में उत्तराखंड में असाधारण जल संकट पैदा हो जाता है। पिछले साल हिमपात न होने से इस बार गर्मियों में नदियों में जल प्रवाह कम रहा था। गर्मियों में प्रमुख ग्लेशियरों पर आधारित भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में जल प्रवाह में 50 प्रतिशत की कमी आ गई थी। [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :August 1, 2010 पर प्रकाशित
घनसाली के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट इस कदर बढ़ा कि गत 17 मई 2010 को 18 घंटे तक पानी के स्रोत पर लगी लम्बी लाइन में खड़ी चार महिलायें बैशाखी देवी, छौंपाड़ी देवी, रुशना देवी तथा यशोदा देवी भूख प्यास के कारण बेहोश होकर गिर पड़ी। इसी तरह जून माह में देवप्रयाग विधानसभा [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 11, 2010 पर प्रकाशित
अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के दर्जनों गाँवों में जल संकट भयावह रूप ले चुका है। जिला प्रशासन व जल संस्थान टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई कर रहा है। पानी की कमी को देखते हुए टैंकरों के चक्कर बढ़ाए जा रहे है। जिला प्रशासन ने विभाग को टैंकर संचालन के लिए साढ़े चार लाख [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 28, 2010 पर प्रकाशित
मंडल मुख्यालय पौड़ी के बाशिन्दों को गर्मियों की तपिश का एहसास मैदानी इलाकों की तरह चिलचिलाती धूप से नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति के पूर्णतया गड़बड़ाने से होता है। पौड़ी से दिखने वाली लंबी हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखला गर्मियों में धुंध की चादर ओढ़ अदृश्य हो जाती है। भूले भटके आये पर्यटकों को ही कभी कभार हिमदर्शन [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 26, 2010 पर प्रकाशित
पानी को बचाने की चिंता अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी की जा रही है। हरित क्रांति के केन्द्र रहे तराई में भी जल संकट गहराता जा रहा है, जिसकी चिंता तराईवासियों के चेहरे पर साफ झलक रही है। जलस्तर तेजी से गिरने का बड़ा कारण बेमौसमी धान की फसल मानी जा रही है। तराई की धरती [...]
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लेखक : प्रदीप तिवारी :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
जनपद चमोली के जिला मुख्यालय में पेयजल संकट दूर करने के लिये गोपेश्वर पेयजल पुनर्गठन योजना हेतु शासन तीन करोड़ रुपये अवमुक्त करने पर सहमत हो गया है। 46 साल पुरानी पेयजल योजना का पुनर्गठन न होने के कारण विगत कई वर्षों से मुख्यालय में पानी का हाहाकर मचा हुआ है। बीते चार-पाँच वर्षों से [...]
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लेखक : जुगल किशोर पांडे :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :July 15, 2009 पर प्रकाशित
ठहरिये! कहीं आप ठुलीगाड़ पेयजल योजना का पानी तो नहीं पी रहे हैं। अगर पी रहे हैं तो आप पीलिया से ग्रस्त भी हो सकते हैं। जून से लेकर 6 जुलाई तक जिला अस्पताल में आने वाले रोगियों की आमद अचानक बढ़ गयी है। इन रोगियों में 90 प्रतिशत पीलिया के हैं। जिला चिकित्सालय के [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :July 15, 2009 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में इस साल अब तक पानी की स्थिति बहुत विकट रही है। जाड़ों में बहुत कम हिमपात होने के कारण सन् 2009 की गर्मियों में बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की बहुत कमी रही। हिमनद से बनने वाली भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में गर्मियों में पानी का औसत प्रवाह लगभग 50 प्रतिशत [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
इस अंक के साथ नैनीताल समाचार अपने 31 वर्ष पूरे कर 32वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह जनमबार अंक हम ‘नदी अंक’ के रूप में निकाल रहे हैं। हालाँकि यह अंक उस रूप में नहीं निकल पा रहा है, जैसा हम चाहते थे या जैसे हमारे अब तक के जनमबार अंक निकलते रहे [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
नदी का सम्बन्ध पानी से है और रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून…….से लेकर तीसरे विश्व युद्ध के पानी के लिए लड़े जाने की आशंकाओं तक पानी की अहमियत जगजाहिर है। पानी जीवन आधारक बुनियादी संसाधन है। पानी के भीतर सूक्ष्म जीवन अंकुरित होता है……कालान्तर में पुष्पित पल्लवित होती है एक पूरी खाद्य-श्रंखला। पानी [...]
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