पेयजल योजनाओं में परम्पराओं का ध्यान रखना जरूरी है
हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि जहाँ लोग परम्परागत ढंग से प्रयोग कर रहे हैं, वहाँ पानी की उपलब्धता बनी है। अन्यथा आये दिन पानी का संकट गहराता जा रहा है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बर्नीगाड़ स्थित गंगनाणी धारा का उदाहरण लें। एक प्रचलित दंतकथा के अनुसार जब [...]
चिट्ठी-पत्री : सदानीराओं के दिन बहुरेंगे?
नदी आन्दोलन सम्बन्धी आलेख रोचक तथा सूचनाप्रद थे। मुझ जैसे व्यक्ति, जिसका सोमेश्वर स्थित पैतृक गाँव ऐन कोसी के तट पर बसा है, उसका हृदय कोसी की वर्तमान दशा देखकर विचलित हो जाता है। आज यह विश्वास ही नहीं होता कि 40 साल पूर्व तक मई-जून के महीनों में भी कोसी में इतना गहरा पानी [...]
मेरि कोसि हरै गे कोसि
जोड़ – आम-बुबु सुणूँ छी गदगदानी ऊँ छी रामनङर पुजूँ छी कौशिकै की कूँ छी पिनाथ बै ऊँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। कौशिकै की कूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। क्या रोपै लगूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। क्या स्यारा छजूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। घट-कुला रिङू छी मेरि [...]
संगठित होना होगा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये
प्रस्तुति : रैमाशी रावत जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये हमें संगठित होना पड़ेगा। यदि हम सत्ता से उम्मीद लगाकर आगे चलना चाहेंगे तो सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। यह कहना था स्वामी अग्निवेश का। वे उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में ‘वैश्वीकरण के दौर में ‘जल, जंगल, [...]
इस व्योपारी को प्यास बहुत है
एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम। अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी, तुम तो पानी के व्योपारी, खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी, बिछी हुई [...]
शिमायल में सौन्दर्य है, मगर पानी नहीं
अंधेरा घिर आया था जब हमारी टीम शिमायल पहुँची। हमारे मेजबान हेम चन्द्र कपिल के घर के बच्चे हमें पानी पिलाने लगे। हमने एक बच्चे से एक बाल्टी पानी भर कर रख देने को कहा। लेकिन वह खाली बाल्टी ले आया। तब मालूम पड़ा कि गाँव में पानी की बड़ी समस्या है। नजदीक में कोई [...]
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