जानवरों और मनुष्यों के बीच समरसता जरूरी है
तेदुओं और अन्य हिंसक जानवरों ने उत्तराखंड में लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। तेदुओं के आतंक से उत्तराखंड का कोई पहाड़ी गाँव अछूता नहीं है। बाघ और हाथियों के साथ ही गुलदार भी लोगों के लिए बढ़ा खतरा बन गये हैं। दस सालों में 250 लोग गुलदार का निवाला बन चुके हैं और [...]
कसूरवार कौन ? आदमी या वन्य जीव…
उत्तराखंड में लंबे समय से वन्य प्राणियों और आबादी के मध्य ‘भूख’ मिटाने की लड़ाई चल रही है। आबादी के साथ ही गुलदार को भी इसकी कीमत अपनी जान चुकाकर देनी पड़ रही है। गुलदार, बाघ, हाथी, सुअर जैसे जंगली जानवरों का कहर यहाँ की आबादी पर टूट रहा है। शेही, बंदर जैसे कई जंगली [...]
कैसे बचायें खेती को जंगली सुअरों की बर्बादी से ?
त्रिलोकमणि पाठक जंगली सुअरों द्वारा कृषि-बागवानी को तहस-नहस करने की घटनायें पहाड़ में अब आम हैं। कभी-कभार सुअरों द्वारा लोगों को जान से मारने अथवा घायल करने के समाचार भी मिलते हैं। ये घटनायें जंगलों से घिरे उन गाँवों में होती हैं, जहाँ ये सुअर झाड़ियों में छुपे रहते हैं। रात होते ही वे फसल, [...]
बिनसर वन्य जीव विहार: जंगली जानवरों से त्रस्त जनता का क्रंदन
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित गाँवों में जंगली जानवरों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। खुंखार जंगली जानवरों से खेती-पाती तो चौपट हो ही गई जान का खतरा भी बढ़ते जा रहा है। आलू, गडेरी व अन्य साक-शब्जियों के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में धान, गेहूँ आदि की फसल भी काफी अच्छी होती थी [...]
कस्तूरी मृगों का अस्तित्व खतरे में
हिमालय क्षेत्र में समुद्र तल से 2,600-4,200 मीटर की ऊँचाई पर पाये जाने वाले कस्तूरी मृग को निहारने की ललक हर किसी वन्य जीव प्रेमी को होती है। यों तो आज ये बेशकीमती दुर्लभ प्रजाति के मृग बदलते पर्यावरण एवं मानवीय दखल के चलते विलुप्ति के कगार पर है। इनको बढ़ावा देने एवं संरक्षित करने [...]
कहाँ गईं चिड़ियायें ?
पितरों का श्राद्ध का पक्ष चल रहा है। उत्तराखंड में भी हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग प्रतिदिन पितृपूजा कर चिड़ियों तथा जानवरों के लिये पत्तलों में खाना घर के बाहर रख देते हैं। पहले पक्षियों में कौवा सबसे महत्वपूर्ण होता था, क्योंकि सबसे पहले वही घर के बाहर रखे पत्तल पर टूट पड़ता था। [...]
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