लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 9, 2011 पर प्रकाशित
प्रवीण कुमार भट्ट तेदुओं और अन्य हिंसक जानवरों ने उत्तराखंड में लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। तेदुओं के आतंक से उत्तराखंड का कोई पहाड़ी गाँव अछूता नहीं है। बाघ और हाथियों के साथ ही गुलदार भी लोगों के लिए बढ़ा खतरा बन गये हैं। दस सालों में 250 लोग गुलदार का निवाला बन [...]
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लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 8, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में लंबे समय से वन्य प्राणियों और आबादी के मध्य ‘भूख’ मिटाने की लड़ाई चल रही है। आबादी के साथ ही गुलदार को भी इसकी कीमत अपनी जान चुकाकर देनी पड़ रही है। गुलदार, बाघ, हाथी, सुअर जैसे जंगली जानवरों का कहर यहाँ की आबादी पर टूट रहा है। शेही, बंदर जैसे कई जंगली [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 13, 2010 पर प्रकाशित
त्रिलोकमणि पाठक जंगली सुअरों द्वारा कृषि-बागवानी को तहस-नहस करने की घटनायें पहाड़ में अब आम हैं। कभी-कभार सुअरों द्वारा लोगों को जान से मारने अथवा घायल करने के समाचार भी मिलते हैं। ये घटनायें जंगलों से घिरे उन गाँवों में होती हैं, जहाँ ये सुअर झाड़ियों में छुपे रहते हैं। रात होते ही वे फसल, [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित गाँवों में जंगली जानवरों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। खुंखार जंगली जानवरों से खेती-पाती तो चौपट हो ही गई जान का खतरा भी बढ़ते जा रहा है। आलू, गडेरी व अन्य साक-शब्जियों के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में धान, गेहूँ आदि की फसल भी काफी अच्छी होती थी [...]
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लेखक : पंकज शर्मा :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 8, 2009 पर प्रकाशित
हिमालय क्षेत्र में समुद्र तल से 2,600-4,200 मीटर की ऊँचाई पर पाये जाने वाले कस्तूरी मृग को निहारने की ललक हर किसी वन्य जीव प्रेमी को होती है। यों तो आज ये बेशकीमती दुर्लभ प्रजाति के मृग बदलते पर्यावरण एवं मानवीय दखल के चलते विलुप्ति के कगार पर है। इनको बढ़ावा देने एवं संरक्षित करने [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 23, 2009 पर प्रकाशित
पितरों का श्राद्ध का पक्ष चल रहा है। उत्तराखंड में भी हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग प्रतिदिन पितृपूजा कर चिड़ियों तथा जानवरों के लिये पत्तलों में खाना घर के बाहर रख देते हैं। पहले पक्षियों में कौवा सबसे महत्वपूर्ण होता था, क्योंकि सबसे पहले वही घर के बाहर रखे पत्तल पर टूट पड़ता था। [...]
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