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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 31, 2011 पर प्रकाशित
डॉ. दिनेश पंत ‘‘जब मुझे ठोकरें लगने लगीं, तब मैंने अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा और आज मैं अच्छी स्थिति में हूँ। बस मैंने अपना धैर्य और हिम्मत बनाये रखे।’’ यह कहना है चम्पा देवी का। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी विकासखंड के एक पिछड़े गाँव मलाड़ की रहने वाली चंपा ने गरीबी [...]
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लेखक : प्रदीप तिवारी :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :August 9, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड की महिलायें अदम्य साहस, वीरता, शौर्य एवं श्रम की प्रतीक हैं। पहाड़ की पहाड़ सी जिन्दगी को अपने हाथों से सँवारने की उनमें क्षमता है। उत्तराखण्ड की संस्कृति ही नहीं, आर्थिकी भी उन्हीं के बलबूते पर टिकी है। पहाड़ सी समस्याओं का समाधान खोजना आसान नहीं, फिर भी कुछ सूक्ष्म प्रयास उनकी जिन्दगी को [...]
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लेखक : भुवन शर्मा :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 26, 2010 पर प्रकाशित
महिला समाख्या ने 10 व 11 अप्रेल को नैनीताल में लोकगीतों का दुर्लभ खजाना खोल कर रख दिया। जो लोग इन दो दिनों में तल्लीताल के परमा शिवलाल दुर्गासाह धर्मशाला में मौजूद रहे, वे अपने आप को निश्चित रूप से भाग्यशाली समझ रहे होंगे। जो लोग मान बैठे हैं कि लोक संस्कृति अब डाइलिसिस पर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
उसने अपनी जिन्दगी में सिर्फ तीन पहाड़ देखे सामने का पहाड़ जिसमें पसरी है जिन्दगी बायें तरफ का पहाड़, जो ढँका है चीड़ों से और वह पहाड़ जिसमें आबाद है उसका गाँव उसने सिर्फ दो ही पट्टियाँ देखीं, मायके और ससुराल की. गाँव के नीचे बहती नदी से उसे खासा लगाव है क्योंकि वह बहकर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 20, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : ईश्वरी दत्त जोशी बात 7 अक्टूबर की है। महिला समाख्या में प्रशिक्षण हेतु मैं चम्पावत जा रहा था। सुबह के सवा दस बजे थे। अभी लोहाघाट से बमुश्किल 5 कि.मी. दूर पहुँचा था कि महिला समाख्या चम्पावत की जिला कार्यक्रम समन्वयक सुश्री भगवती का फोन आया कि प्रशिक्षण में भाग लेने आ रही [...]
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लेखक : ओम प्रकाश भट्ट :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 8, 2009 पर प्रकाशित
सितम्बर का महीना उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिला के लिए जोखिम लेकर आता है। बरसात के बाद घास से लकदक पहाडी चट्टानों का सम्मोहन उसे खींच लेता है। लेकिन मवेशियों के लिए चारे के जुगाड़ की यह यात्रा न जाने कितनी महिलाओं की अंतिम यात्रा में बदल जाती है। सितम्बर से लेकर फरवरी तक पहाड़ों में [...]
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लेखक : जुगल किशोर पांडे :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड में महिला डेरी परियोजना के तहत 785 महिला डेरी दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों ने 80 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करते हुए प्रतिदिन 22 हजार लीटर दुग्ध उपार्जन करने के साथ ही अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन किया। परियोजना में महिला कर्मचारियों का संख्या बल अच्छा खासा है। लेकिन इन कर्मचारियों की [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :February 15, 2009 पर प्रकाशित
घटना थोड़ी पुरानी जरूर हो गयी है, लेकिन हमारे समाज और सरकार के ऊपर एक बदनुमा दाग छोड़ गयी है। जिस तरह की विसंगतियों को लेकर राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ी गयी थी, वे विसंगतियाँ कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। राज्य आंदोलन के दौरान हमारे नेताओं की जुबान पर पहाड़ की [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
सरकार भले ही अस्पताल में प्रसव यानी जीवन वरदान नारे को आम जनता तक पहुँचाने के लिये करोड़ों रुपया क्यों न खर्च कर रही हो, लेकिन दिनेशपुर के चिकित्साकर्मियों को शायद ही इस नारे की अहमियत का ख्याल हो। यदि होता तो एक गरीब महिला को अपने नवजात शिशु से हाथ न धोना पड़ता। गौरतलब [...]
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लेखक : लक्ष्मी नौटियाल :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2007:: वर्ष :: 31 :October 15, 2007 पर प्रकाशित
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में व्यवसाय से अपनी आजीविका चलाने का ज्यादा प्रचलन नहीं रहा । मगर अब रोजगार के घटते अवसरों के कारण पुरुष तो निजी व्यवसाय अपना ही रहे हैं, महिलायें भी पीछे नहीं हैं। पहाड़ में व्यवसाय रिटायरमेंट के बाद टाइम पास करने के साधन के रूप में शुरू हुआ या फिर [...]
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