समाज कल्याण विभाग, पौड़ी द्वारा गरीब, असहाय और विधवाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों को समय पर नहीं मिल पाने से उनमें रोष व्याप्त है। योजना के तहत विधवाओं व विकलांगों को पेंशन, पारिवारिक लाभ, विधवा की पुत्री की शादी के लिए आर्थिक सुविधा, 12वीं पास कन्या को कन्याधन योजना के तहत मिलने वाली धनराशि वर्ष 2009 से नहीं मिल पाई है। इसके पात्र जब भी विभाग के चक्कर लगाते हैं, वे बजट नहीं होने का बहाना बनाकर उनको टरका देते हैं। यहाँ तक कि कुष्ठ रोगियों व परित्यक्ता (पति द्वारा त्यागी गई महिला) महिलाओं को मिलने वाली सहायता भी नहीं मिल पा रही है। विभाग शासनादेश नहीं मिलने की बात करता है। एक जनप्रतिनिधि द्वारा समाज कल्याण विभाग से ‘सूचना के अधिकार’ के तहत विभाग से मिलने वाली पेंशन प्रक्रिया की जानकारी चाही गयी तो उन्हें 1990 में जारी शासनादेश की छायाप्रति थमा दी। जबकि उस समय मात्र रु. 100 पेंशन दी जाती थी।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सरकार ने जनहित में इन योजनाओं के संबंध में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं व टीवी चैनलों को लाखों रुपये के विज्ञापन दिये। लेकिन तत्संबंधी पात्र ग्रामीण विधवा, असहाय गरीब समाज कल्याण विभाग की सरल पेंशन प्रक्रिया से अनभिज्ञ हैं। कोई पात्र व्यक्ति किसी सामाजिक कार्यकर्ता अथवा जनप्रतिनिधि के सहयोग से तत्संबंधी कार्यवाही पूरी कर विभाग के कार्यालय पहुँच भी जाता है तो उसकी नहीं सुनी जाती।
हालांकि सरकार न्याय पंचायत स्तर पर बहुउद्देशीय शिविर लगा रही है लेकिन इन योजनाओं का लाभ वहाँ भी नहीं मिल पा रहा है। पात्र व्यक्ति के कई बार विभाग में आवेदन ही गुम हो जाते हैं। अपवाद स्वरूप कभी कार्यवाही हो भी गई तो उसके चैक पोस्ट ऑफिस के खाते में जमा होते हैं लेकिन वे अकसर कई दिनों तक ब्लॉक मुख्यालयों में पड़े रहते हैं या ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के झोले में। कभी अज्ञानतावश लाभार्थी उन चैकों को अपने ही घर पर रख देते हैं। पोस्ट ऑफिस में जमा करने पर उन्हें रसीद नहीं मिलती। वहाँ उनकी पेंशन आयी भी होती है तो उन्हें कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
पूर्व में समाज कल्याण विभाग ने पेंशन धारकों को अपने खाते भारतीय स्टेट बैंक या पंजाब नेशनल बैंक में मात्र जीरो से खाता खोलने की सुविधा दी थी किन्तु बैंक वाले रु. 200 मात्र जमा करे बगैर खाता नहीं खोलते और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा भी नहीं है। इस तरह की तमाम शिकायतें मिलने के उपरान्त समाज कल्याण मंत्री ने गाँव-गाँव में पेंशनधारियों को उनकी पेंशन पहुँचाने के लिये कल्स्टर योजना चलाई, ताकि विभाग द्वारा फर्जी लोगों को लाभ न पहुँचे व पात्र लोग ही लाभांवित हों लेकिन ऐसे कई मामले संज्ञान में आये हैं जो लोग गाँवों में तो नहीं रहते पर उनके नाम से पेंशन राशि फिक्स डिपोजिट की तरह पोस्ट ऑफिस के माध्यम से उनके खातों में जमा हो रही है लेकिन ऐसे कई लोग हैं जिनकी पेंशन स्वीकृत है पर उसका लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।
ek bar fir se B.J.P ko mauka dena chahaiye …