जागरूकता की कमी और जल्दबाजी की आदत के कारण ट्रेफिक जाम हर जगह आम हो गया है। लोग गाड़ियाँ आड़ी-तिरछी खड़ी कर अन्य वाहनों का रास्ता बन्द कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं। सड़क पर अपनी लाइन में चल रहे होते हैं तो यह महसूस नहीं करते कि जब तक सामने वाले वाहन आगे नहीं बढ़ जाते, हमें भी आगे बढ़ने की राह नहीं मिलेगी, जबरन दूसरों के मुँह के आगे से गाड़ी ले जाकर अपना वाहन खड़ा कर देते हैं। कोई रुकने का इशारा भी करे तो ध्यान नहीं देते। जो जगह पहले से फँसे हुए वाहनों को आगे बढ़ने के लिये चाहिये होती है, वहाँ पर पहुँच कर अपना वाहन खड़ा कर देते हैं। यदि वह जगह खाली छोड़ी होती तो चालीस-पचास वाहन आगे बढ़ सकते थे। एक के गलत तरीके से आगे बढ़ने के कारण कोई भी आगे बढ़ नहीं पाता है। शहर के बाहर सुनसान सड़कों पर वे कितना ही तेज चलकर अपनी मंजिल पर पहुँच सकते हैं। उनका फर्ज बनता है कि शहरों में दूसरे वाहनों को पास देते हुए बारी-बारी से आरामपूर्वक आगे बढ़ते रहें। ऐसा लगे जैसे सब कुछ कम्प्यूटर से संचालित हो रहा है। कुछ लोग कहते हैं कि छोटी गाड़ी वाले ही सड़क पर जाम लगाते हैं, इसलिये इन्हें शहर से बाहर कर देना चाहिये। कुछ लोग कहते हैं कि बड़ी गाड़ी वाले सड़क पर जाम लगाते हैं इसलिये इन्हें शहर से बाहर कर देना चाहिये। सभी की सोच यही है कि सड़क पर हम ही चलें, दूसरा जाये भाड़ में। यदि सभी ट्रेफिक के नियमों का पालन करते हुए चलेंगे तो सभी को राह मिलेगी।
कभी हम यह भी देखते हैं कि सामने वाले वाहन रुके हुए हैं या ट्रेफिक जाम के कारण फँसे हुए हैं, जिससे सड़क पर दूसरों को आगे बढ़ने के लिये जगह नहीं मिल पाती। ऐसे में हमारा फर्ज यही बनता है कि उनके मुंह के आगे अपने वाहन को खड़े करने की अपेक्षा उनके आगे बढ़ने के लिये उचित जगह छोड़ दें तथा कुछ पीछे ही रुके रहें जिससे रास्ता एकदम साफ हो सके। वाहनों को तिरछा लगाने पर दूसरे वाहन धीरे-धीरे सरकने को मजबूर रहते हैं जिससे ट्रेफिक साफ होने में ज्यादा समय लगता है तथा सड़कों पर ट्रेफिक का दबाव बढ़ता ही जाता है, क्योंकि कम जगह में ड्राइवरों को अपना वाहन आगे बढ़ाने पर आपस में टकराने का बहुत ज्यादा डर लगता है। जरा खरोंच भी लग जाने पर ड्राइवर आपस में बहुत बुरी तरह झगड़ते हैं क्योंकि आजकल महंगी कारों के दरवाजे ही एक-एक लाख रुपये के होते हैं। माना की सड़कों की चौड़ाई कम है लेकिन लम्बाई में कोई कमी नहीं। आप पीछे तक सही प्रकार से लाइन लगा सकते हैं। अपने स्कूटर -मोटर साइकिलों को सही तरह से सड़क के किनारे दबा कर पार्क करें। आगे-पीछे देख कर सही जगह का चुनाव करें। स्कूटर वाले एवं आम नागरिक ट्रेफिक जाम की सूचना आगे से आने वाले वाहन को दे सकते हैं, जिससे वे सावधानी से चलें।
शहर के अन्दर ट्रेफिक पर दबाव बढ़ जाने के कारण हमें स्वयं ही वन वे की व्यवस्था करनी चाहिये। वरना प्रशासन को ऐसी व्यवस्था लागू करनी पड़ती है। इस क्षेत्र में विदेशी हमसे बाजी मार ले गये हैं। वे सड़क पर अपनी बारी से ही आगे बढ़ते हैं। चाहे एक ही मिनट का काम ही क्यों न हो, वे बीच सड़क में एकदम से नहीं रुक जाते। अभी भारत वर्ष को यह सीखने में 50 वर्ष और लगेंगे। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि इन छोटी-छोटी बातों का पालन करके हम सभी इस ‘ट्रेफिक जाम’ से बच सकते हैं। नये नियमों का पालन करने से सड़क पर ट्रेफिक का दबाव बढ़ने के बावजूद आप ट्रेफिक जाम का नामोनिशान नहीं देखेंगे।


























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