रहेंगे याद तुम्हारे गीत
एक मर्मस्पर्शी व्यक्तित्व पर्वत श्रृंखलाओं में![]()
दूर-दूर तक विचरता रहेगा इस देव भूमि में,
अनगिनत हृदयों में सूक्ष्म रूप से
यादों के स्पन्दन में समाया रहेगा कण-कण में, जन-जन में।
सरल स्वभाव आत्मीयता से भरी आँखे
आने वाली नस्लों को पहाड़ों के प्रति लगाव
प्रेरणा देती रहेंगी हर मन में।
हर जन का कल्याण सोचने वाले ओ गिर्दा!
पहाड़ों का हर शख्स जलायेगा यादों का दिया अन्तर्मन में,
उत्तराखण्ड की संस्कृति समाई थी इस पवित्र हृदय में
कुमाऊँ गढ़वाल को संग ले चले एक पक्ष में,
आओ मिल कर ओ पवित्र धरा के मानस पूतो
उनके चलाये आन्दोलन के वेग की
मंजिल आसमाँ तक पहुँचाएं इस देवभूमि में।
करेंगे याद तुम्हारे गीत सभी जनमानस सदियों तक
तुम्हारी प्रेरणा से सजायेंगे अपनी संस्कृति इस देवभूमि में
पवित्र पावन तुम, इस देवभूमि के आंचल में
देता हूँ श्रद्धांजलि तुम्हें व्यथित मन से
अश्रु में,नमन में, धारा बहने लगी नयनों में।
- बसन्त गुरुरानी
तुम जिंदा रहोगे हमारे बीच!
मौन हुई गूंज
एक कविता की
गरजदार गूँज का मौन होना!
दमदार, जोश से भरी
आवाज का मौन होना!
यही है हमारे गिरदा का मौन होना।
पहाड़ की खामोशियाँ तुम्हें पूछती हैं।
तुम पहाड़, पहाड़ तुम
तुम थे गिरि
बोलो! जनकवि
अब कौन हरहरायेगा
हमारी भावना को शब्दों में ?
नितांत शब्द नहीं
अपने में प्रश्न बनी आवाज थे तुम।![]()
सत्ता के गलियारों को चैंकाती
तुम्हारी गूँज
हमारी बेड़ी बनी है।
हम नहीं छोड़ पायेंगे
तुम्हारे गीतों से अब
आबाद होंगे
हमारे आंदोलनो के मंच
तुम्हारी मस्त
अल्हड़ रवानगी का त्रास
झेलेंगी हमारी साँसें
गिरदा
बात कहने की है
कि ‘‘तुम जिंदा रहोगे हमारे बीच’’
पर वो भारी-भरकम
गरजदार गिरदा का
सामने होना
और उनकी का याद होना
अंतर तो है ना दोस्त!
- विमल भाई