हेमन्त बिष्ट
मुझे कई बार शेरदा के बाल-सुलभ भोलेपन को देखने का मौका मिला। महामहिम राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला द्वारा नैनीताल राजभवन को जनता के लिए खोले जाने का कार्यक्रम था। समारोह प्रातः नौ बजे से प्रारम्भ होना था। मैं शीघ्रता से राजभवन की ओर बढ़ रहा था कि गेट पर शेरदा मिल गये। बोले, ’’मुझे एक कविता पढ़नी है।’’ मैने डरते डरते बताया कि कार्यक्रम तो कल ही फाइनल हो गया है, अब तो नया कुछ जोड़ना संभव नहीं होगा। शेरदा नाराज होकर बोले, ’’संचालन तो तुम कर रहे हो- बोल देना।’’
मैंने राज्यपाल के ए.डी.सी व आयोजकों से पूछा कि उत्तराखण्ड के प्रख्यात कवि हैं, उनकी छोटी कविता जोड़ लूँ ? उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। उधर शेरदा बार-बार ग्रीन रूम में मुझे बुलाकर बाल हठ करने लगे। मैं घबराहट में ही संचालन कर रहा था कि अनायास ही अगले कार्यक्रम पर दृष्टि गई। मैंने हिम्मत कर उद्घोषित किया, ’’अगली प्रस्तुति- गीत और नाटक प्रभाग द्वारा प्रस्तुत एक गाना- ’पार्वती को मैतुड़ा देश……’ सौभाग्य से इस गीत के रचयिता श्री शेर सिंह अनपढ़ यहाँ उपस्थित हैं। इस गीत से पहले उनके उद्गार सुनें।’’ शेरदा मंच की ओर ऐसे लपके जैसे किसी बच्चे को मनचाहा खिलौना मिल गया हो। उन्होंनं कविता प्रस्तुत की:-
’’हिन्दुओं कैं राम-राम, मुस्लिमों कैं सलाम, सिक्खों कैं सतश्रिया काला, ओ बरनाला।
जनसमुदाय से जबर्दस्त ठहाका लगा तो महामहिम ने संकेत से मुझे अपने पास बुला लिया, ‘‘ये क्या कह रहे हैं ट्रान्सलेट करो।’’ मैं उन्हीं के समीप घुटनों के बल जमीन पर बैठ गया और डर के मारे न जाने क्या-क्या कहता रहा। याद करके आज तक सिहंर जाता हूँ। गर्वनर साहब बोले, इन्हे कुछ पुरस्कार देना चाहता हूँ। प्रोटोकाल अधिकारी एक लिफाफा लाए, मैंने उद्घोषणा की कि महामहिम शेरदा को एक भेंट देना चाहते हैं। कृपया स्वीकार करें।’’ फिर शेरदा आये। कहने लगे कि मंच से ही होता तो अच्छा होता। मैंने फिर से डरते-मरते उद्घोषणा की कि, ‘‘शेरदा मंच पर महामहिम से सम्मान प्राप्त करने हेतु प्रतीक्षित।’’ मंच पर दो सीढि़याँ….. जैसे ही महामहिम मंच की ओर बढ़े कि प्रोटोकोल अधिकारी ने शेरदा को संकेत किया और शेरदा, स्वयं नीचे उतरने लगे। महामहिम मंच पर और शेरदा मंच के नीचे। लेकिन महामहिम स्वयं शेरदा के पास गए और उन्हे सम्मानित किया। प्रोटोकोल अधिेकारी से बोले, ’’ये क्या करवा रहे हैं आप ?’’ फिर अचानक मेरे डरे हुए पीले चेहरे को देखकर हँसते हुए बोले, ’’लेकिन जो भी हो रहा है इन्टरेस्टिंग हो रहा है।’’
शेरदा के बाल सुलभ व्यक्तित्व से राजभवन का प्रोटोकोल मीलों पीछे छूट गया।