उत्तराखंड सरकार ने हल्द्वानी व हरिद्वार नगरपालिकाओं को भंग कर इन्हें नगर निगम बना दिया है और दोनों जगह जिलाधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर दिया है। हरिद्वार में ढाई लाख तथा हल्द्वानी में दो लाख की आबादी इनके दायरे में है। मुख्यमंत्री ने 21 मई को देहरादून में बताया कि दोनों नगर निगमों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार छोटे-छोटे नगर पंचायतों के गठन के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि दो हजार करोड़ रुपये की राशि से राज्य के 31 शहरों में जलापूर्ति, सीवर व्यवस्था, सीवर ट्रीटमेंट, कचरा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था दुरुस्त की जायेगी। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि हरिद्वार व हल्द्वानी नगरों का दायरा बढ़ाने के लिए जल्दी ही सर्वे कार्य शुरू हो जायेगा।
हल्द्वानी व हरिद्वार नगर निगमों के गठन के बाद राज्य में तीन नगर निगम और 30 नगरपालिकाएँ व 30 नगर पंचायत हो गई हैं। देहरादून 1998 से ही नगर निगम है। इन दोनों नगर निगमों में बतौर प्रशासक जिलाधिकारियों ने कार्यभार सम्हाल लिया है। उ. प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 में पाँच लाख की आबादी पर नगर निगम, तीन लाख पर नगरपालिका व दो लाख या इससे कम में नगर पंचायतों के गठन का प्रावधान है। छः माह पूर्व उत्तराखंड सरकार द्वारा इसमें संशोधन कर पहाड़ों में एक लाख की आबादी पर नगर पंचायत व सवा लाख की आबादी पर नगर निगम बनाये जाने का शासनादेश जारी कर दिया।
मौजूदा नगरपालिका क्षेत्र के अनुसार फिलहाल हल्द्वानी नगर निगम का क्षेत्रफल 10.62 वर्ग किमी. है। इसके पूर्व में गौला नदी का किनारा, पश्चिम में मुखानी नहर, उत्तर में रानीबाग का पुल तथा दक्षिण में बरेली रोड पर सब्जी मंडी और रामपुर रोड में सुशीला तिवाड़ी अस्पताल के ऊपर आईटीआई सड़क है। प्रस्तावित सीमा विस्तार से पूरब में गौलापार के 6 गाँव, पश्चिम में कटघरिया, दक्षिण में बरेली रोड में मोतीनगर, रामपुर रोड में फुटकुआं और उत्तर में रानीबाग तक का क्षेत्र शामिल किया जाना है। शहर के बाशिन्दों को उम्मीद है कि भविष्य में नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा। लेकिन निगमों के गठन से कांग्रेस खुश नहीं दिखाई देती। वे बगैर चुनाव अधिसूचना जारी किये नगरपालिका को भंग करने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ मानते हैं। वे इसे आगामी विधान सभा चुनावों में फायदा उठाने की निशंक सरकार की राजनीतिक चाल बताते हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेसियों ने हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन भी किया।
राजनीतिक हलकों में कयास लगाया जा रहा है कि निशंक ने नगरपालिकाओं को भंग कर बड़ा दाँव खेला है। हल्द्वानी में अध्यक्ष कांग्रेस की थी और हरिद्वार में भाजपा की। जिस दिन मायावती का हरिद्वार में कार्यक्रम तय था, उसके एक दिन पूर्व निगमों के गठन की अधिसूचना जारी हो गई। इससे कांग्रेस व बसपा में हलचल मचना स्वाभाविक है। चुनावों में, विशेषकर तराई में भाजपा इसका लाभ उठाने की कोशिश करेगी। फिलवक्त हरिद्वार जिले की नौ सीटों में से दो और नैनीताल जिले की पाँच सीटों में से चार पर भाजपा का कब्जा है। नए परिसीमन से हरिद्वार की 11 सीटों पर विशेष फोकस होगा। इस बीच सरकार के कामकाज को लेकर जनता में नाराजी बढ़ती जा रही है। हल्द्वानी में इन्दिरा हृदयेश को पिछले विधान सभा में भितरघात के कारण हार का सामना तो करना पड़ा, लेकिन उनके रुतबे में कोई कमी नहीं आई। इस बीच जिस तरीके से कांग्रेसी दिग्गज एक साथ दिखने लगे हैं उसका फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा ही।