18वां उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह इस बार श्रीनगर स्थित नगरपालिका सभागार में 25 मार्च को सम्पन्न हुआ। महज औपचारिकता के लिये सम्पन्न इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्राचार्य और सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. राम सिंह को उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट ने इस वर्ष का सम्मान दिया, वहीं युवा पत्रकार दीपक आजाद को भी पुरस्कृत किया गया। ट्रस्ट की ओर से दूरदर्शन के पूर्व समाचार सम्पादक, नाटककार व पत्रकार राजेन्द्र धस्माना ने आजाद को स्मृति चिन्ह तथा नकद पुरस्कार से नवाजा।
समारोह के प्रथम सत्र में उत्तराखंड में ताबड़तोड़ बन रही जलविद्युत परियोजनाओं का सच उजागर करते हुए प्रमुख आर्थिक विश्लेषक भरत झुनझुनवाला ने कहा कि इस राज्य की ऊर्जा का लाभ वास्तव में दिल्ली, देहरादून व अन्य बड़े नगर/ शहरों को मिल रहा है, जबकि स्थानीय लोग इन विद्युत परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित हो रहे हैं। एक एयरकंडीशंड मकान में जितनी बिजली खपती है, उतने में एक बड़ा गाँव रोशन हो सकता है। प्रो. झुनझुनवाला ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में मुख्य योगदान कृषि तथा सेवा क्षेत्र का है, और इनमें बिजली की नाममात्र खपत है।
डॉ. रामसिंह ने आज की पत्रकारिता पर दुःख जताते हुए कहा कि चित्र व शयनकक्ष पत्रकारिता ने पठनीय परम्परा को मार दिया है, यह चिन्ता का विषय है। इसी सत्र में पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, प्रख्यात लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी, वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर थपलियाल ‘समदर्शी’, दीपक आजाद, ट्रस्ट की महासचिव मीरा रावत और कोषाध्यक्ष ललित कोठियाल, पत्रकार जे.पी. सेमवाल, बी. शंकर थपलियाल आदि ने भी विचार रखे।
द्वितीय सत्र में पत्रकारिता विषय पर हुई बहस में अन्ततः प्रत्येक उमेश डोभाल सम्मान समारोह की भांति इसमें भी वक्ताओं ने आम आदमी की पत्रकारिता करने की नसीहत दी तथा मौजूदा लेखन की खामियां गिनाई। इसमें राज्य की एस सी आर टी से आये उप निदेशक डॉ. अरुण कुकसाल, पौड़ी आकाशवाणी निदेशक चक्रधर कंडवाल, पत्रकार विमल नेगी, डॉ. शेखर पाठक गैरसैंण से आये पत्रकार पुरुषोत्तम असनोड़ा सहित कई अन्य लोगों ने अपनी बात रखी। इस बार के समारोह में कई महत्वपूर्ण लोगों की अनुपस्थिति सोचनीय रही। अधिकांश पत्रकार व बुद्धिजीवी महज औपचारिकता निभाते नजर आये। गंभीरता व इस आयोजन का उद्देश्य नदारद थी। द्वितीय सत्र के आधे में ही अधिकांश आगन्तुकों के खिसक जाने के कारण अन्त में निकाला जाने वाला जलूस इस वर्ष नहीं निकल पाया। अलबत्ता लोकरचनाकार नरेन्द्र सिंह नेगी ने इस परम्परा को जिंदा रखने के लिये सभागार में ही अपनी नई रचना -‘उत्तराखंड की धरती डामूला डाम्यालि जी’ सुनाई। समारोह का संचालन पत्रकार गंगा थपलियाल असनोड़ा तथा मीरा रावत ने संयुक्त रूप से किया।

























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