दिल्ली के राष्ट्रीय अखबारों में उत्तराखंड की खबरें कम छपती हैं। लेकिन कुछ दिनों से उनका रेला सा आ गया है। सबसे हाल की खबर है देहरादून में 10 जनवरी को दक्षिण एशिया के शीतकालीन खेलों के उद्घाटन के समय हुई अव्यवस्था- आमंत्रित लोगों के लिए स्थान पर्याप्त न होना; अतिथियों का स्थान न पा सकना; राज्यपाल मार्गेट अल्वा को न बुलाया जाना और उनका इसके बावजूद पहँुच जाना; पत्रकारों का स्थान पाने के लिए प्रदर्शन करना; कलाकारों के प्रदर्शन में आने वाली बाधाएँ, मंत्रियों के लंबे भाषणों से दर्शकों का उकता जाना तथा सूफी गायक कैलाश खेर, जिसे सुनने अधिकतर लोग आए थे, को ठीक से न सुन पाना आदि।
देहरादून में तो खेलों का उद्घाटन मात्र था। असली और अधिकतर प्रतियोगितायें तो जोशीमठ के ऊपर 9,000 फीट ऊँचे हिमाच्छादित घास के ढलान पर होनी हैं। इनमें भाग लेने पाकिस्तान से तेईस, नेपाल से दस, मालदीव से चार, बांग्लादेश से तीन तथा श्रीलंका से पाँच खिलाड़ी आए हैं। पहली बार हो रहे आयोजन में केन्द्र तथा उत्तराखंड सरकारों ने 150 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। औली में और अधिक अव्यवस्था होने की आशंका है। वहाँ हाल के दिनों तक बर्फ बनाने की मशीन ठीक से काम नहीं कर पा रही थी। जिस ढलान पर स्कीइंग होनी है, उसमें गड्ढे हो गए थे। खेलों के लिये अधिगृहीत जमीन का मुआवजा न दिए जाने से प्रभावित लोग रोष प्रदर्शन की चेतावनी दे रहे थे।
लेकिन मैं तो उत्तराखंड के बारे में दिल्ली में छपी खबरों पर लिख रहा था। लगभग सभी खबरें प्रतिकूल थीं। पहले खबर छपी थी कि वन निगम ने लच्छीवाला आरक्षित वन क्षेत्र में 300 से अधिक हरे पेड़ काट डाले हैं और कुपित पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री निशंक को पत्र लिखा है। खबर में कहा गया था कि वहाँ 5.4 हेक्टेयर का जडी-बूटी उद्यान बनाने के लिये जंगल का सफाया हो रहा है। जयराम रमेश ने लिखा है कि बगैर इजाजत शीशम, खैर, सेमल, सफेद बाँज इत्यादि के इन पेड़ों का कटान तुरंत बंद किया जाये। कटे पेड़ों की तसवीरें भी छपी हैं।
राज्य में बहुत बड़ी संख्या में जल विद्युत परियोजनाओं की स्वीकृति दिए जाने की खबरें भी छपी हैं, जिनमें कहा गया है कि वे वहाँ के पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव डालेंगी। इस मुद्दे पर केंद्र के कण्ट्रोलर जनरल (कैग) की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। लगता है कि इन प्रतिकूल खबरों का प्रतिकार करने उत्तराखंड सरकार ने सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंन्दुस्तान टाइम्स’ में लाखों की लागत का दो पेजों का रंगीन विज्ञापन छपवाया है, जिसमें राज्य की उपलब्धियाँ गिनायी गई हैं। उसमें गरीबों के लिए सस्ता अनाज, गाँवों का विद्युतीकरण, 20,000 नई नौकरियों का खोला जाना, अटल ग्राम योजना, पाठशालाओं की वृद्धि तथा बीमारों-घायलों को अस्पताल ले जाने की ‘108’ सुविधा प्रमुख हैं।
अपनी धूमिल होती छवि को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने विज्ञापन में बहुत बड़ा व्यय किया है।