उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष त्रिवेन्द्र पँवार के नेतृत्व में दल की कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने 27 दिसम्बर की शाम राज्यपाल मार्गेट अल्वा को एक पत्र सौंप कर भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में उक्रांद का कोई भी विधायक या दायित्वधारी नहीं था। बताया जा रहा है कि इस निर्णय पर पहुँचने से पहले पार्टी के विधायकों की सहमति नहीं ली गई थी। इस कदम से पँवार ने अपनी ताकत का एहसास अपने विधायकों को करवाने की कोशिश की। दूध का जला छाँछ भी फूँक-फूँक कर पीता है। शायद पँवार ने सोचा हो कि कहीं रामनगर में हुई बैठक सा हाल न हो। लेकिन इस निर्णय से अंतिम क्या निकल कर आयेगा, यह तो समय ही बतायेगा।
पार्टी के विधायक तो खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह कुछ लोगों का किया फैसला है, न कि उत्तराखंड क्रांति दल का। विधायक ओम गोपाल कहते हैं कि इस तरह के फैसले वही लोग कर सकते हैं, जो पंचायत का चुनाव भी नहीं जीत सकते और अध्यक्ष बन बैठे हैं। मुद्दों को लेकर लड़ते, मुद्दों की बात करते तो बात मानी जाती। विकसित आई.टी. के इस जमाने में हम से फोन पर ही सहमति ले ली जाती। उधर उक्रांद कोटे से मंत्री बने दिवाकर भट्ट ने कहा कि ये छपास अध्यक्ष हैं। उन्हें अखबार में नाम चाहिये। सबको साथ लेकर चलते और फिर जनता तक जाते, तब उस फैसले का कोई वजन होता। राजनीति क्या है, इस बात से ये अनभिज्ञ हैं। मैं देहरादून में था। मीटिंग की डेट निश्चित हो गयी थी। उससे चार दिन पहले ही अपनी मर्जी से समर्थन वापिस लेने का क्या तुक है ? कौन मानेगा इस फैसले को ? यह तो मात्र पार्टी की व अपनी छीछालेदारी हुई।
इस तरह समर्थन वापसी का तो सवाल ही नहीं उठता। यह तो कुछ लोगों का फैसला है न कि उक्रांद का। बाजपुर की बैठक के बाद ही फैसला होना था। इस फैसले ने तो अध्यक्ष की अपरिपक्वता का परिचय दिया है। काशी सिंह ऐरी का कहना था कि मैंने जब इस्तीफा दिया तो वह समय की माँग थी। लेकिन इस समय हमें विश्वास में तो लेना ही चाहिये था। कहा जाता है कि, ‘नादान दोस्त से सयाना दुश्मन अच्छा होता है’। उधर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ए. पी. जुयाल, अध्यक्ष कपरवाण एवं दो को छोड़कर सभी जिलाध्यक्षों की राय है कि जो फैसला लिया गया है वह सही है। अध्यक्ष त्रिवेन्द्र पँवार का दावा है उन्होंने विधायकों और दायित्वधारियों से पहले ही पूछ लिया था। ऐरी जी का इस्तीफा हमारे पास पहले ही पड़ा था कि मैं जब चाहूँ उसका प्रयोग करूँ। इसमें पूछना क्या ? मेरे पास पावर है। लेकिन अध्यक्ष यह भूल रहे हैं कि ऐरी जैसा राजनीतिज्ञ क्या इतनी जल्दी पार्टी का सिंबल या मान्यता को खतरे में डाल कर इतनी अदूरदर्शिता का परिचय तो नहीं देता। अध्यक्ष यह भी कह रहे हैं कि हमने अपना कार्य कर दिया है। विधायक जहाँ चाहें वहाँ रहें। वह सरकार में रहना चाहते हैं या बाहर। पार्टी को कोई नुकसान नहीं होने वाला और न ही पार्टी का कोई चुनाव चिन्ह कहीं जाने वाला।