जिला अल्मोड़ा के बसौली-सुनोली क्षेत्र के ग्रामीण सिविल व पंचायती वनों में लीसा गड़ान शुरू होने की खबर नैनीताल समाचार (15 से 31 जुलाई 2011) में प्रकाशित होने पर यहाँ के लोग इसके विरोध में खड़े हो गये। सुनोली ग्राम पंचायत की बैठक में ग्रामीणों ने लीसा गड़ान के विरोध में प्रस्ताव पहले ही पास कर दिया था। 23 अगस्त को सुनोली में क्षेत्र के सामाजिक संगठनों तथा जागरूक व्यक्तियों द्वारा एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान ही सूचना मिलने पर लोगों ने लीसे के 52 टिन पकड़ कर पुलिस व वन विभाग को सूचना दे दी। उप प्रभागीय वनाधिकारी अमरीश कुमार के आने पर जाँच शुरू हो गई। अगले दिन सुनोली में 74 टिन लीसा और पकड़ा गया।
स्थानीय ठेकेदार चंचल सिंह भाकुनी ने स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवा कर सुनोली ग्राम पंचायत क्षेत्र के नाप खेतों में खड़े 610 चीड़ के पेड़ों में लीसा गड़ाने की स्वीकृति ली और फिर सिविल वन से हजारों पेड़ों पर लीसा लगा दिया। जिन लोगों के हस्ताक्षर करवाये गये, उनके पास जमीन ही नहीं है। उधर वन पंचायत भैंसोड़ी के विरोध के बावजूद इनाकोट की वन पंचायत में लीसा लगा दिया। इस प्रकरण को लेकर ग्रामीणों का एक शिष्टमंडल 25 अगस्त को जिलाधिकारी व प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा से मिला। शिष्टमंडल में ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट, वन पंचायत सरपंच संगठन के सतीश पाण्डे, ईश्वर जोशी, लक्ष्मण सिंह भाकुनी, सुनोली के पूर्व प्रधान राजेन्द्र सिंह भाकुनी, किसन राम आदि शामिल थे। फिलहाल मामला दर्ज कर जाँच के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में जाँच समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया है।